जिले के मनोहरथाना क्षेत्र में टन-टोकरी बालाजी मार्ग पर एक नवजात बालक मिला। अज्ञात व्यक्ति द्वारा छोड़े गए इस बालक को मंगलवार को जिला बाल कल्याण समिति, झालावाड़ ने अपने संरक्षण में ले लिया। नवजात को अब गवर्नमेंट विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण एजेंसी में सुरक्षित रखा गया है, जहां उसकी नियमित देखभाल और स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष शिवराज सिंह हाड़ा और सदस्य गजेंद्र सेन मंगलवार को झालावाड़ के जनाना अस्पताल पहुंचे। उन्होंने उप अधीक्षक राधेश्याम बैरवा की उपस्थिति में सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं और नवजात को समिति के संरक्षण में लिया। इसके बाद बालक को नियमानुसार गवर्नमेंट विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण एजेंसी में प्रवेश दिलाया गया। समिति अध्यक्ष शिवराज सिंह हाड़ा ने बताया कि नवजात बालक के संबंध में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। संबंधित विभागों की जांच और आवश्यक औपचारिकताओं के बाद जब बच्चे को कानूनी रूप से 'लीगल फ्री' घोषित किया जाएगा, तब केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण (सीएआरए) के दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र एवं इच्छुक दंपती को विधिवत गोद दिया जाएगा। उन्होंने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों पर जोर दिया। बाल कल्याण समिति के सदस्य गजेंद्र सेन ने जानकारी दी कि नवजात बालक पूरी तरह स्वस्थ है। चिकित्सकों की निगरानी में उसका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा और पोषण, चिकित्सा व अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। शिशु गृह में प्रशिक्षित कर्मचारियों की देखरेख में उसकी समुचित देखभाल की जाएगी ताकि उसे सुरक्षित एवं पारिवारिक वातावरण मिल सके। उल्लेखनीय है कि मनोहरथाना क्षेत्र के टन-टोकरी बालाजी मार्ग पर नवजात को छोड़े जाने की सूचना मिलने पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की थी। बच्चे को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उसकी स्थिति सामान्य पाई गई। इसके बाद बाल संरक्षण से जुड़े सभी वैधानिक प्रावधानों का पालन करते हुए बाल कल्याण समिति ने उसे अपने संरक्षण में लिया। इस दौरान शिशु गृह समन्वयक दीपक गौतम, मेल नर्स शारिक बेग, एनआईसीयू इंचार्ज परमेश्वर गुप्ता, ड्यूटी डॉक्टर सहित जनाना अस्पताल का चिकित्सा एवं नर्सिंग स्टाफ भी मौजूद रहा। समिति ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी भी परित्यक्त अथवा जरूरतमंद बच्चे की जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस अथवा बाल संरक्षण विभाग को सूचित करें, ताकि समय पर उसकी सुरक्षा और उचित देखभाल की जा सके।