झालावाड़ में राधारमण प्रांगण में 25 अप्रैल को 6 दिवसीय शिविर का शुभारंभ हुआ। इस शिविर में हजारों लोगों को बिना दवा के प्राकृतिक रूप से स्वस्थ जीवन जीने के उपाय बताए गए। शिविर का मुख्य केंद्र 'प्रवचन नहीं, प्रयोग' रहा, जिसमें प्रतिभागियों को सही भोजन, उचित व्यायाम और पर्याप्त नींद के माध्यम से मस्तिष्क विकास, शारीरिक शक्ति और ऊर्जा बढ़ाने के व्यावहारिक तरीके सिखाए गए। संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि इसका उद्देश्य शरीर के आंतरिक ऊर्जा स्तर को बढ़ाना और मस्तिष्क की क्षमताओं को विकसित करना है। जीवन जीने के तरीकों में बदलाव लाना है लक्ष्य पहले दिन 2 घंटे तक चले शिविर में विभिन्न प्रयोगों के बाद मस्तिष्क शक्ति बढ़ाने में सहायक 18 से 20 प्रकार के पौष्टिक नाश्ते का विवरण और वितरण भी किया गया। शिविर की कोऑर्डिनेटर दीपशिखा अग्रवाल ने बताया कि इस पहल का लक्ष्य लोगों के जीवन जीने के तरीके में सकारात्मक बदलाव लाना और स्वास्थ्य के प्रति एक नया दृष्टिकोण प्रदान करना है। 4 हजार से ज्यादा लोगों ने लिया भाग पहले दिन करीब 4 हजार से ज्यादा पुरुष और महिलाओं ने शिविर में भाग लेकर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया। भीड़ ने तल्लीनता से नए प्रयोगों का आनंद लिया। शिविर के प्रवेश द्वार पर प्रत्येक साधक का तिलक व आरती से स्वागत किया गया। इस शिविर में असनावर, अकलेरा, झालावाड़ शहर, झालरापाटन और अन्य ग्रामीण इलाकों से लोग पहुंचे और इसका लाभ उठाया। प्रतिभागियों ने भगवान गणेश के भजन पर जमकर नृत्य भी किया। धूप का महत्व गिनाया इस अवसर पर घर में रखे मसालों और प्राकृतिक वातावरण का लाभ उठाने पर जोर दिया। धूप के महत्व को बताते हुए कहा गया कि धूप लेने से बिना दवा के कैल्शियम की पूर्ति होती है, जिससे चलने-फिरने में होने वाला दर्द कम हो सकता है। सूर्य के महत्व और ऊर्जा स्तर बढ़ाने में इसकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया, साथ ही शरीर को शक्तिशाली बनाने और पृथ्वी के अनुकूल रहने की जानकारी दी। 18 प्रकार के पौष्टिक नाश्ते की व्यवस्था शिविर के दौरान अदृश्य नाश्ता लेकर एक साथ सूर्यदेव की आराधना व भोजन मंत्र के साथ आधे घंटे से कम समय में एकसाथ सभी ने यह नाश्ता ग्रहण किया। नाश्ते में गन्ना, पपीता, भुनी हुई सौंफ, तरबूज, अंगूर, सेवफल, लोकी, मौसमी, अलसी के अलावा कई पौष्टिक नाश्ता उपलब्ध कराया। सभी ने इसके गुणों के साथ स्वाद की तारीफ करते हुए बताया कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि रसपूर्ण नाश्ते में इतना स्वाद भी होता हैं। इस नाश्ते से बॉडी डिटॉक्स होती है, सैकड़ों लोगों ने अदृश्य नाश्ते को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया। इनका रहा विशेष सहयोग इस शिविर में निजी स्कूल प्रिंसिपल दीपशिखा अग्रवाल, डॉ. डीके जैन, लक्ष्मीकांत अग्रवाल, पारस अग्रवाल, सुधीर खंडेलवाल, धीरज सिंह झाला, रविराज पाटीदार, शशिकांत जैन, जितेंद्र दाधीच, प्रवीण भाटिया, राजेश अग्रवाल आदि का सहयोग रहा।