अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर के पीडियाट्रिक सर्जरी के डॉक्टरों ने 7 साल के मासूम का जटिल और दुर्लभ ऑपरेशन किया। डॉक्टरों ने बच्चे के पेट से 3.7 किलोग्राम वजन का कैंसरग्रस्त किडनी ट्यूमर (विल्म्स ट्यूमर) सफलतापूर्वक निकाला। लगभग 6 घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने शरीर की सबसे मुख्य रक्त वाहिनी इन्फीरियर वेना कावा (IVC) का दोबारा निर्माण भी किया। 4 साल से बढ़ रही थी पेट में सूजन यह बच्चा 4 साल से पेट के दाहिने हिस्से में लगातार बढ़ रही सूजन से परेशान था। एम्स में जब बच्चे का सीटी स्कैन किया गया तो डॉक्टर हैरान रह गए। ट्यूमर का आकार 24 × 21 × 18 सेंटीमीटर तक पहुंच चुका था। वहीं ट्यूमर ने दाहिनी किडनी को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। ट्यूमर इतना बड़ा था कि उसने पेट के अंदर मौजूद लीवर, अग्न्याशय (पैंक्रियास), आंतों और मूत्राशय को उनकी जगह से खिसका दिया था। सबसे खतरनाक बात यह थी कि कैंसर ने दिल तक गंदा खून पहुंचाने वाली शरीर की सबसे बड़ी नस (IVC) और बाईं किडनी की मुख्य शिरा को भी ब्लॉक कर दिया था। 6 सेंटीमीटर के पैच से बनाई नई नस बाल शल्य चिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. राहुल सक्सेना के नेतृत्व में जटिल ऑपरेशन की प्लानिंग की गई। उन्होंने बताया- सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने दाहिनी किडनी और पूरी मूत्रवाहिनी (यूरेटर) को ट्यूमर समेत बाहर निकाला। चूंकि मुख्य नस (IVC) की दीवार के अंदर तक कैंसर जा चुका था, इसलिए डॉक्टरों ने नस के प्रभावित हिस्से को काटकर अलग किया। इसकी जगह 6 सेंटीमीटर का बोवाइन पेरिकार्डियल पैच लगाकर नस को दोबारा नया रूप दिया। ऑपरेशन के तुरंत बाद एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड से जांच की गई, जिसमें खून का बहाव बिल्कुल सामान्य पाया गया। डॉ. राहुल सक्सेना ने बताया- ट्यूमर का आकार बहुत बड़ा था और उसने शरीर की सबसे महत्वपूर्ण खून की नस को जकड़ रखा था। ऐसी सर्जरी में पीडियाट्रिक सर्जन, वैस्कुलर सर्जन, एनेस्थीसिया टीम और रेडियोलॉजिस्ट ने सामूहिक प्रयास किए। बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे ऑपरेशन के बाद की पहली कीमोथेरेपी भी दे दी गई है। पेट में गांठ को न करें अनदेखा एम्स के बाल शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष पाठक ने बताया- बच्चों में होने वाले किडनी कैंसर (विल्म्स ट्यूमर) का अगर सही समय पर पता चल जाए, तो इसका शत-प्रतिशत इलाज मुमकिन है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि यदि बच्चे के पेट में किसी भी तरह की लगातार सूजन या गांठ दिखाई दे, तो उसे घरेलू दर्द या गैस की समस्या मानकर नजरअंदाज न करें। तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि समय पर लिया गया फैसला बच्चे की जान बचा सकता है। इस ऑपरेशन को अंजाम देने में एम्स के कई विभागों के विशेषज्ञों ने सामूहिक भूमिका निभाई। सर्जरी टीम: डॉ. राहुल सक्सेना (लीड), डॉ. अनिरुद्ध माथुर, डॉ. सुरेंद्र पटेल (CTVS विभाग), रेजिडेंट डॉक्टर्स डॉ. जॉयल सनी और डॉ. हर्षवर्धन। एनेस्थीसिया टीम: डॉ. सादिक (ऑपरेशन के दौरान बच्चे की सांसें और लाइफ सपोर्ट स्थिर रखा)। रेडियोलॉजी: डॉ. तरुणा यादव (ऑपरेशन से पहले की मैपिंग)। नर्सिंग टीम: सुरेश और नवेद।