डीडवाना-कुचामन जिले के कुचामन सिटी के राजकीय अस्पताल के पालना गृह में छोड़े गए 3-4 दिन के नवजात की हालत लगातार गंभीर बनी हुई है। जन्म के समय करीब 3 किलो वजन होना चाहिए, लेकिन इस बच्चे का वजन सिर्फ 1.380 किलोग्राम है। खून और किडनी में संक्रमण के चलते पहले उसे नागौर के जेएलएन अस्पताल के एमसीएच विंग में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर अब जोधपुर रेफर किया गया है। फिलहाल मेडिकल टीम बच्चे की जान बचाने के लिए लगातार इलाज और निगरानी में जुटी हुई है। पढ़िए… सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम 1. पालना गृह में छोड़ा गया नवजात, तुरंत शुरू हुआ इलाज 5 जुलाई की शाम करीब पांच बजे एक अज्ञात महिला अपने 3-4 दिन के नवजात को कुचामन के राजकीय अस्पताल के पालना गृह में छोड़कर चली गई। पालना गृह की घंटी बजते ही अस्पताल प्रशासन और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और बच्चे को तुरंत अपने संरक्षण में लेकर प्राथमिक उपचार शुरू किया। बच्चे की हालत गंभीर होने के कारण बाल कल्याण समिति के निर्देश पर सोमवार(6 जुलाई) को उसे नागौर के जेएलएन अस्पताल के एमसीएच विंग रेफर किया गया। 2. नागौर में रातभर चला इलाज, रिपोर्ट आने के बाद जोधपुर रेफर नागौर के एमसीएच विंग में चार डॉक्टरों की टीम पूरी रात बच्चे के इलाज में जुटी रही। शुरुआत में उसकी हालत में थोड़ा सुधार दिखाई दिया, लेकिन बाद में आई मेडिकल रिपोर्ट में उसके खून में गंभीर संक्रमण और किडनी पर संक्रमण की पुष्टि हुई। हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए नवजात को जोधपुर रेफर कर दिया। 3. वजन सिर्फ 1.380 किलो, ऑक्सीजन के सहारे चल रहा इलाज डॉक्टरों के अनुसार सामान्य नवजात का वजन करीब तीन किलोग्राम होता है, लेकिन इस बच्चे का वजन सिर्फ 1.380 किलोग्राम है। कम वजन होने से उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर है। उसे सांस लेने में दिक्कत होने के कारण लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। ब्लड रिपोर्ट में संक्रमण मिलने के बाद इलाज का तरीका बदला गया और विशेष दवाइयां शुरू की गईं। डॉक्टरों का कहना है कि कम वजन और संक्रमण के कारण बच्चे की हालत अब भी बेहद नाजुक बनी हुई है। 4. पालना गृह में मिले नवजात का इलाज जारी, डॉक्टर लगातार निगरानी में अस्पताल प्रशासन ने पालना गृह में मिले नवजात को तुरंत संरक्षण में लेकर इलाज शुरू किया था। हालत गंभीर होने पर उसे पहले नागौर रेफर किया गया और वहां इलाज के दौरान स्थिति और बिगड़ने पर अब जोधपुर भेजा गया है। फिलहाल डॉक्टरों की टीम बच्चे की जान बचाने के लिए लगातार निगरानी रख रही है और हर जरूरी इलाज किया जा रहा है। 5. दो साल में पालना गृह में मिले करीब आधा दर्जन नवजात बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष मनोज सोनी ने बताया - पालना गृह में मिलने वाले, किसी माता द्वारा सरेंडर किए गए या लावारिस मिले नवजातों को तय कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले समिति के सामने पेश किया जाता है। इसके बाद उन्हें सुरक्षित देखभाल के लिए राजकीय शिशु गृह में रखा जाता है। समिति 60 दिन तक बच्चे के परिजनों के सामने आने का इंतजार करती है। यदि कोई दावा करता है तो पूरी कानूनी प्रक्रिया के बाद ही बच्चे को सुपुर्द किया जाता है। फिलहाल इस नवजात के मामले में सबसे बड़ी प्राथमिकता उसकी जान बचाना है।