शादी मतलब... पति-पत्नी के बीच सात जन्मों का वादा। सुख-दुख और साथ जीने-मरने की कसमें। ये सच साबित हुआ है जोधपुर में। जहां पति-पत्नी के बीच ऐसा अटूट प्रेम कि दोनों शादी के बाद हमेशा साथ रहे और दोनों ने 24 घंटे के भीतर दुनिया छोड़ दी। जोधपुर के ‘राधा-कृष्ण’ अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके प्रेम और साथ जीने-मरने की कसमें परिवार और आसपास के लोगों को सालों तक याद रहेंगी। दरअसल, जोधपुर के कुड़ी की रहने वाली राधा कंवर राठौड़ (60) का हार्टअटैक से 26 अप्रैल 2026 को निधन हो गया था। राधा की मौत के अगले ही दिन (27 अप्रैल) उनके पति किशन सिंह राठौड़ (कृष्ण) (70) की भी मौत हो गई। परिवार ने बताया कि दोनों दिनभर ठाकुरजी की सेवा में लगे रहते थे। हमेशा एक साथ रहते थे। एक कहीं बाहर चला जाता था, तो दूसरा बेचैन हो जाता था। कुछ घंटों में ही दोनों का निधन हो गया कृष्ण सिंह की बेटी ममता ने बताया- पापा पिछले करीब पांच साल से बीमार थे। मां बिल्कुल स्वस्थ थीं। मां ने पापा की खूब सेवा की। 26 अप्रैल को मां को हार्ट अटैक आ गया। उन्हें हॉस्पिटल ले गए। वहां दूसरा अटैक आया और पंद्रह मिनट में ही उनकी मौत हो गई। मां के निधन के अगले दिन पापा की भी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें एम्स में एडिमट कराया था। कुछ घंटे बाद उनका निधन हो गया। सासू मां को ढूंढते रहते थे ममता ने बताया कि दोनों के बीच अटूट प्रेम था। उन्हें याद नहीं कि पापा ने खुद को कभी मां से 10 मिनट भी अलग किया हो। पापा हर समय राधा-राधा नाम ही पुकारते रहते थे, मां यदि दस मिनट भी कहीं चली जाती थी तो वो उन्हें ही ढूंढते रहते। पुत्रवधु रितिका ने बताया कि उनके ससुर को पैदल चलने में तकलीफ थी, लेकिन सासू मां कभी इधर-उधर होतीं तो वो उनके पीछे उन्हें ढूंढते हुए आ जाते थे। अब सासू मां चली गईं, तो उन्हें भी ढूंढते हुए खुद उनके पास पहुंच गए। मरने के बाद भी साथ रहेंगे राधा की बहन गायत्री ने बताया कि उनकी दीदी का नाम राधा था। जिस प्रकार से राधा-कृष्ण के बगैर अधूरी थी। उसी प्रकार उनके जीजा और जीजी एक दूसरे के बगैर अधूरे थे। दोनों के बीच इतना प्रेम था कि मरने के बाद भी राधा और कृष्ण एक साथ ही रहेंगे। मेरी बहन ने एक दिन उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। मेरी बहन ने मरने के बाद भी उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। एक दिन बाद ही उन्हें (जीजा) भी अपने पास बुला दिया। 1977 में हुई थी शादी किशन सिंह सेंट्रल वाटर डिपार्टमेंट से ड्राइवर पोस्ट से रिटायर थे। राधा और कृष्ण की शादी 21 अप्रैल 1977 को बीकानेर में हुई थी। परिवार ने हाल ही में उनकी 49वीं मैरिज एनिवर्सिरी मनाई थी। ममता ने बताया कि हम अगले साल धूमधाम से उनकी 50वीं सालगिरह सेलिब्रेट करने की सोच रहे थे, लेकिन सब अधूरा रह गया। …. ये खबर भी पढ़िए… दोस्त की मौत की खबर सुन दूसरे दोस्त ने दम-तोड़ा:स्कूल में साथ-साथ पढ़े, मुंबई में व्यापार किया, एक ही दिन हुआ अंतिम संस्कार पाली जिले में दोस्त की मौत की खबर सुन दूसरे दोस्त ने भी 12 घंटे के भीतर दम तोड़ दिया। दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे। साथ-साथ पढ़ाई की थी। इसके बाद साथ में मुंबई में रहे और व्यापार किया। पूरी खबर पढ़िए…