जोधपुर की पावन धरती पर धींगा गवर का मेला इस साल भी धूमधाम से मनाया जाएगा। हर परंपरा की तरह इस बार भी यह रस्म पूरी श्रद्धा से निभाई गई। जोधपुर के शनिश्चरजी का थान, बख्तावरमल जी बाग में भंवरलाल मेवाड़ा के घर गवर माता की एक माह तक विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस पावन अवसर पर कई भक्तिमय कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जो राजस्थानी संस्कृति की जीवंतता को उजागर करते हैं। धींगा गवर मेला जोधपुर क्षेत्र की अनूठी परंपरा है, जहां बेटी के ससुराल जाने के बाद उसके मायके वाले एक माह तक उसकी प्रतीकात्मक पूजा करते हैं। लोक कथाओं में गवर माता को बेटियों की रक्षक माना जाता है। रंग-बिरंगी पोशाकें सिलवाई गई अनीता मेवाड़ा ने बताया- माता के लिए अलग-अलग रंग-बिरंगी पोशाकें सिलवाई गई। रोजाना सुबह आरती, भजन-कीर्तन और विशेष भोग लगाए गए। पारंपरिक व्यंजनों जैसे घेवर, लड्डू और मेवे की मिठाइयों से माता को प्रसन्न किया गया। यह रिवाज पीढ़ी-दर-पीढ़ी बेटी-रिश्ते की मिठास संजोए रखता है। अनीता बोलीं यह हमारी संस्कृति का प्रमाण है, जो आधुनिकता के बीच परंपराओं को जीवित रखता है। मेला क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा देता है बता दें कि धींगा गवर मेला क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा देता है। दूर-दराज से भक्त आते हैं, जो जोधपुर की लोक संस्कृति का दीदार करते हैं। इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। भंवरलाल परिवार ने सभी का स्वागत किया और प्रसाद वितरण किया। यह मेला हमें सिखाता है कि परंपराएं अमर हैं, जो समाज को मजबूत बनाती हैं। कुल मिलाकर, जोधपुर की यह धार्मिक धूम एक मिसाल है।