जोधपुर और फलोदी में करीब सप्ताहभर रुक-रुककर हुई बारिश से रबी की फसल में बड़े स्तर पर खराबा हुआ है। खेतों में कटी पड़ी फसलें पानी में डूब गईं। कई जगह खड़ी फसलें गिर गईं। किसी किसान ने बैंक से तो किसी ने साहूकार से कर्ज लेकर खेती में पैसा लगाया था। किसानों को उम्मीद थी कि इस बार फसल अच्छी होगी तो बैंक और साहूकारों का कर्ज लौटा देंगे। लेकिन बेमौसम बारिश और कई इलाकों में हुई ओलावृष्टि ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब किसानों के सामने आजीविका का संकट तक खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है… फसलें खराब होने से लागत भी निकलना मुश्किल है। वहीं बच्चों की पढ़ाई के लिए भी कर्ज लेना पड़ेगा। सरकार की तरफ से अभी तक किसी स्पेशल गिरदावरी या मुआवजे का ऐलान नहीं किया गया है, जिससे उन्हें थोड़ी राहत मिल सके। 200 किलोमीटर दूर से आकर खेती करते हैं फलोदी के नौसर के किसान श्रवण ने बताया कि हम पिछले 10 साल से पीपाड़ (जोधपुर) से करीब 200 किलोमीटर दूर यहां आकर खेती कर रहे हैं। खेत के मालिक से 40 बीघा जमीन बंटाई पर लेकर जीरा, गेहूं और चना की फसल बोई। अब बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से फसल खराब होने के कारण मजदूरी का पैसा भी घर से देना पड़ रहा है। इससे परिवार का पालन पोषण करना भी कठिन हो गया और बच्चों की पढ़ाई चुनौती बन गई। श्रवण के अनुसार उन पर करीब 4 लाख रुपए का कर्ज है। उन्हें उपज में से एक चौथाई हिस्सा मिलता है। बाकी तीन चौथाई हिस्साा खेत मालिक को देना होता है। परिवार 6 महीने से बेहतर फसल की उम्मीद में मेहनत कर रहा था, लेकिन बरसात ने अरमानों पर पानी फेर दिया। उन्होंने 10 बीघा में जीरे की फसल बोई थी, जो पूरी तरह खराब हो गई। जिस पर उन्होंने अब ट्रैक्टर चला दिया, क्योंकि बची हुई फसल में मजदूरी भी नहीं निकाल पाती। श्रवण के अनुसार 40 बीघा में लागत लगभग ढाई लाख रुपए आई और मुश्किल से अब 50 हजार रुपए की फसल बची है। ऐसा नहीं सोचा था खाली हाथ जाएंगे फसल में नुकसान की ये पीड़ा अकेले श्रवण की नहीं है। यहां के उन सभी किसानों की है जिन्होंने कई किलोमीटर दूर से यहां आकर और एक कमरे में रहकर 6 महीने तक पसीना बहाया। बंटाई पर खेत लेकर फसल को पकाया। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार गांव जाएंगे तो 6 महीने की पसीने की कमाई लेकर जाएंगे, लेकिन इस बार खाली हाथ लौटना पड़ेगा, उन्होंने ऐसा नहीं सोचा था। कुछ साल पहले तक करीब 800 परिवार पीपाड़, भोपालगढ़ और कुड़ी से नौसर क्षेत्र में आकर बंटाईदार किसान के रूप में काम करते थे। धीरे-धीरे इनकी संख्या करीब 200 ही रह गई। इस बार की बर्बादी के बाद तो संख्या और भी कम रह जाएगी। बेटियों की पढ़ाई पर संकट अपनी जमीन पर खेती करने वाले पंवारों की ढाणी निवासी किसान महिपाल बिश्नोई के हालात भी श्रवण से अलग नहीं हैं। उन्होंने बताया कि वे 25 बीघा जमीन में खेती करते हैं। उन्होंने जीरा, मेथी और गेहूं की फसल बोई थी। वे ट्यूबवेल के जरिए फसल की सिंचाई करते हैं। महिपाल ने बताया कि फसल पककर तैयार हो गई और मेथी की फसल काटकर इकट्ठा कर रखी थी, लेकिन बारिश से फसल खेत में ही भीग गई। बारिश से मेथी की फसल लगभग पूरी तरह खराब हो चुकी है। वहीं गेहूं की फसल अभी तक खेत में खड़ी है, जिसके बारिश में भीगने के चलते दाना खराब हो गया है। महिपाल खेत में बने एक कमरे में 4 बच्चों के साथ रहते हैं। उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। उन पर करीब 5 लाख रुपए का कर्ज है। यह पैसा साहूकार से 2 रुपए प्रति सैकड़ा ब्याज के हिसाब से ले रखा है। महिपाल ने बताया कि अब उनके सामने चार बेटियों की पढ़ाई-लिखाई करवाने और परिवार का खर्च चलाने का संकट है। बेमौसम बारिश के चलते उन्हें करीब डेढ़ लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। परिवार खेती-बाड़ी पर ही निर्भर पंचायत पल्ली प्रथम के गंगाराम कड़वासरा ने अपनी 30 बीघा जमीन पर जीरा, ईसबगोल और गेहूं की फसल बोई थी। उन्हें 4 से 5 लाख रुपए की फसल होने की उम्मीद थी, जो बारिश के चलते टूट गई। परिवार खेतीबाड़ी पर ही निर्भर है। आय का मुख्य साधन भी खेती ही है। गंगाराम ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। एक 10वीं और दूसरा 12वीं क्लास में पढ़ रहा है। खेती करने में उन्होंने करीब दो लाख रुपए खर्च किए, लेकिन अब खेती से 40 से 50 हजार रुपए ही आ पाएगा। ऐसे में उनके सामने परिवार का खर्च चलाने का भी संकट है। गंगाराम पर भी करीब 3 लाख रुपए का कर्ज है, जो उन्होंने साहूकारों से ब्याज पर लिया है। रबी की फसल ही मुख्य फसल होती है। इसलिए किसान आमदनी का बड़ा हिस्सा इसी फसल से प्राप्त करते हैं। ऐसे में बच्चों की स्कूल फीस और घर सहित अन्य खर्चों को चलना मुश्किल हो रहा है। बारिश से तिंवरी, मथानिया, ओसियां, फलोदी, नौसर, लोहावट, बालेसर और बिलाड़ा इलाके ज्यादा प्रभावित हुए हैं। किस फसल को कितना नुकसान जोधपुर और फलोदी की प्रमुख नकदी फसल जीरा है। इस बार किसानों ने 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जीरे की फसल बोई थी। इसमें से 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसल बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। ओसियां, तिंवरी, लोहावट, नौसर और आसपास के क्षेत्रों में पिछेती जीरे की फसल में ज्यादा खराबा हुआ है। कई किसानों का कटा हुआ जीरा भी खेतों में भीगकर खराब हो गया है। इस फसल में 50% से 70% तक नुकसान की आशंका जताई जा रही है। फसल की गुणवत्ता प्रभावित दोनों जिलों में गेहूं की फसल कटाई के अंतिम चरण में थी। लगातार बारिश और तेज हवा के कारण फसल गिरने (लॉजिंग) से दानों की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। कई खेतों में दानों में नमी बढ़ने से अंकुरण की समस्या भी सामने आई है। तिंवरी से लेकर फलोदी और बालेसर क्षेत्रों तक गेहूं में 30% से 60% तक खराबे की स्थिति बन गई है। दोनों जिलों में करीब 70 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल की बुवाई की गई थी। चने की फसल में भी नुकसान कटाई के बाद खेतों में सुखाने के लिए रखी गई चने की फसल बारिश में भीग गई, जिससे दाने काले पड़ने लग गए। सड़ने और फफूंदी लगने की समस्या भी हो गई। फलोदी, लोहावट, ओसियां और बिलाड़ा क्षेत्र में चने की फसल में ज्यादा नुकसान हुआ है। बारिश से चने की गुणवत्ता गिरने के कारण मंडियों में कम कीमत मिलने की संभावना है। चना की फसल में 40% तक खराबा माना जा रहा है। दोनों जिलों में 20 हजार हेक्टेयर में चना की बुवाई हुई थी। किसानों को भारी नुकसान भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री तुलछाराम सीवर ने बताया कि मार्च के अंत में और अप्रैल की शुरुआत में हुई बारिश के चलते किसानों को भारी नुकसान हुआ है। मेथी, चना, गेहूं, ईसबगोल की फसलें खराब हुई हैं। सहयोग: जेठमल जैन, तिंवरी जुगल किशोर शर्मा, नौसर … बारिश से फसल खराब होने की ये खबर भी पढ़ें… किसान बोले- बच्चों की फीस भी नहीं दें सकेंगे:मकान बनाने का सपना तोड़ दिया, कर्ज के बोझ से कमर टूटी; बारिश-ओलावृष्टि से फसल बर्बाद 'इस बार की फसल से पक्की रसोई और रहने के लिए मकान बनाने की सोची थी। बेमौसम बारिश ने सारे सपने चकनाचूर कर दिए।' यह दर्द है सीकर के कुड़ली गांव की किसान झिमकोरी देवी का। उनकी 24 बीघा में लहलहाती फसल खराब हो गई। (पूरी खबर पढ़ें)