करौली के विशिष्ट न्यायाधीश (पॉक्सो कोर्ट) वृजेश कुमार शर्मा ने नाबालिग से रेप, अपहरण और ब्लैकमेलिंग के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास और 1 लाख 15 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पीड़िता को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने जांच में भारी अनियमितता बरतने पर तत्कालीन अनुसंधान अधिकारी (एएसआई) के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए हैं। यह मामला हिण्डौन निवासी एक महिला की शिकायत पर आधारित है। महिला ने थाना नई मंडी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी 16 वर्षीय पुत्री 9 जून 2025 की रात को घर से लापता हो गई थी। पुलिस जांच के बाद पीड़िता को 18 जून 2025 को केरल से दस्तयाब किया गया। पीड़िता ने अपने बयानों में बताया कि आरोपी ने दोस्ती के बहाने उसे हिण्डौन के एक होटल में बुलाया, जहां उसके साथ रेप किया गया और उसका आपर्तिजनक वीडियो बना लिया गया। इसी वीडियो का इस्तेमाल कर आरोपी उसे लगातार ब्लैकमेल कर रहा था। घटना की रात, आरोपी अपने एक साथी के साथ पीड़िता के घर पहुंचा और उसे डरा-धमकाकर कार में बैठा लिया। इसके बाद आरोपी उसे हिण्डौन रेलवे स्टेशन से दिल्ली और फिर केरल ले गया, जहां एक क्वार्टर में बंधक बनाकर उसके साथ दोबारा रेप किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में कुल 18 गवाह और 19 दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने आरोपी को गंभीर धाराओं में दोषी पाया। कोर्ट ने अपने फैसले में पुलिस कार्यप्रणाली पर भी कड़ा रुख अपनाया। अनुसंधान अधिकारी एएसआई रविंद्र सिंह द्वारा जांच में बरती गई भारी लापरवाही और अनियमितताओं को देखते हुए, अदालत ने पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) को उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।