केवलादेव घना पक्षी विहार में पांचना बांध के पानी की मांग को लेकर आज धरना दिया गया। धरने में पर्यावरणविद्, नेचर गाइड, पर्यटन व्यवसायी और रिक्शा यूनियन के सदस्य मौजूद रहे। सभी संगठनों का कहना है कि घना पक्षी विहार को नियमित रूप से पांचना बांध का पानी मिलना चाहिए। केवलादेव में पानी की कमी के कारण जीव-जंतुओं को पानी के लिए भटकना पड़ता है। पानी नहीं होने के कारण घना पक्षी विहार का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। पक्षी विशेषज्ञ डॉ. धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि केवलादेव घना पक्षी विहार में पानी लाने के लिए 'घना बचाओ, पांचना का पानी लाओ' संघर्ष समिति का गठन किया गया है। समिति में मॉर्निंग वॉकर्स संघ, नेचर गाइड एसोसिएशन, होटल एसोसिएशन, रिक्शा यूनियन, व्यापारिक संगठनों और आसपास के गांवों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, जो इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे। गुरुग्राम कैनाल का पानी दूषित केवलादेव घना पक्षी विहार के लिए पांचना बांध का प्राकृतिक पानी ही सबसे उपयुक्त है। हाल ही में गुरुग्राम कैनाल से छोड़ा गया पानी दूषित था, जिससे उद्यान की जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हुआ है। घना पक्षी विहार में पानी की कमी के चलते कछुए और मछलियां मर रही हैं। प्रवासी पक्षी भी यहां अधिक समय तक नहीं रुक पा रहे हैं। पांचना का पानी पक्षियों के लिए जरूरी उन्होंने बताया कि हाल ही में आए गुलाबी फ्लेमिंगो का दल भी मात्र दो दिन रुककर लौट गया। पांचना के प्राकृतिक पानी में मिलने वाले छोटे जलीय जीव और वनस्पतियां ही प्रवासी पक्षियों के भोजन और प्रजनन के लिए आवश्यक हैं। घना पक्षी विहार केवल वन्यजीवों का आश्रय स्थल नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका का भी साधन है। उन्होंने बताया कि गाइड, रिक्शा चालक, होटल व्यवसायी, टैक्सी संचालक और पर्यटन से जुड़े अनेक लोगों की रोजी-रोटी इस उद्यान पर निर्भर है। यदि समय रहते पानी की व्यवस्था नहीं हुई तो पर्यटन प्रभावित होगा और केवलादेव को विश्व धरोहर का दर्जा भी खतरे में पड़ सकता है।