पीबीएम अस्पताल से लिए गए 32 तरह की दवाओं के सैंपलों में से 8 की रिपोर्ट आ गई है। यह सभी दवाएं स्टैंडर्ड क्वालिटी की पाई गई हैं। 24 तरह की दवाओं की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पीबीएम जनाना विंग में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 6 प्रसूताओं की किडनी फेल होने की घटना को देखते हुए ड्रग कंट्रोलर विभाग ने प्रसूताओं को दी गई 32 तरह की दवाओं के सैंपल लिए थे। जिन 8 दवाओं के सैंपलों की रिपोर्ट आई है, वे सभी आरएमएससीएल से सप्लाई की गई हैं। अभी ऑक्सीटोसिन सहित विभिन्न प्रकार की 24 दवाओं और सर्जिकल आइटमों की रिपोर्ट आनी बाकी है। उनमें निजी फार्मा कंपनियों से खरीदी गई दवाएं भी शामिल हैं। वहीं दूसरी तरफ ओटी को संक्रमण मुक्त करने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी की गई एसओपी को लागू करना प्रशासन के लिए भारी पड़ रहा है। भास्कर पड़ताल में पता चला है कि जनाना विंग के ऑपरेशन थिएटर में पांच टेबल हैं, जो 20 मिनट भी खाली नहीं रहतीं। एसओपी के तहत एक सिजेरियन के बाद टेबल कम से कम 20 मिनट खाली रखकर वहां सफाई होनी चाहिए। ओटी का टेबल क्लॉथ बदलने सहित स्वाब, खून आदि को केमिकल से साफ करना होता है, लेकिन 15 से 20 सिजेरियन रोज होने के कारण एसओपी की पालना ही नहीं हो पाती, जिससे संक्रमण फैलना आम बात है। भास्कर इनसाइट - कल्चर लेने के लिए 2 ही नर्सिंग अफसर पीबीएम अस्पताल में ए-बी ब्लॉक, यूरोलॉजी, एसएसबी, ईएनटी, ट्रॉमा को मिलाकर करीब 26 ऑपरेशन थिएटर और छह आईसीयू हैं, लेकिन इनका स्टरलाइजेशन और फ्यूमिगेशन प्रॉपर नहीं हो पाता। कारण, कल्चर का सैंपल लेने के लिए दो ही ट्रेंड नर्सिंग ऑफिसर हैं। पिछले दिनों पोस्ट ऑपरेटिव और सी वार्ड का कल्चर कराया था। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर तत्काल फ्यूमिगेशन करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए नर्सिंग स्टाफ को सैंपल लेने की ट्रेनिंग माइक्रोबायोलॉजी विभाग में शुरू की गई है। खास तौर पर ओटी, आईसीयू, पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड और सभी वार्डों के चार-चार नर्सिंग स्टाफ को ट्रेंड किया जा रहा है। इंजेक्शन और उनके बैच नंबर डिक्लोफेनाक – L125151 और L125152, एग्रोन रेमेडीज, काशी डायक्लोफेनाक – DC225006, ड्यूफुल, जयपुर ड्रोटावेरिन – GA5K003, इस्कॉट एडिन, सोलन रेनिटिडिन – NA25K09, मार्टिनेन ब्राउन, सोलन मैग्नीशियम फॉस्फेट – MGA12514, नंदनी मेडिकल लेबोरेटरी, इंदौर डेक्सोना – AGOX29, एग्रोन डायनाप्रोटॉन जेल क्रीम – I240, कांटेक हेल्थ केयर, रुड़की भास्कर एक्सपर्ट - डॉ. तरुणा स्वामी, एचओडी, माइक्रोबायोलॉजी दो सर्जरी में 20 मिनट का अंतराल जरूरी सर्जरी से पूर्व डॉक्टर 5 मिनट तक कोहनी तक हाथ धोएं, स्टरलाइज ग्लव्स और स्क्रब किए कपड़े पहनें। लेबर रूम और ओटी को चार जोनों में बांटकर अनधिकृत प्रवेश रोकें। 3-बाल्टी प्रणाली (डिटर्जेंट/1% सोडियम हाइपोक्लोराइड) से दिन में 3 बार सफाई करें। उपकरणों को ऑटोक्लेव/सीएसएसडी से नि-संक्रमित करें। साप्ताहिक फॉगिंग/डीप क्लीनिंग सुनिश्चित करें। दो सर्जरी के बीच 20 मिनट का अंतराल रखें। ओटी का तापमान 20-25°C, 20-25 एयर चेंज, लेबर रूम में अनुकूल एचवीएसी और लैमिनार फ्लो/एचईपीएस फिल्टर हो। प्रसव टेबल के मैकिन्टोश बदलें। ओटी का कचरा पिछले दरवाजे से निकालें। सर्जरी/सिजेरियन से 1 घंटा पूर्व रोगनिरोधी एंटीबायोटिक दें। फ्लूइड और चीरा लगाने से पहले बीटाडीन/अल्कोहल से पूर्ण प्रासंगिक बंध्यता बनाए रखें। संक्रमण के संदेह पर ब्लड, यूरिन, स्वाब और पर्यावरण के सैंपल तुरंत माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजें। “ओटी, आईसीयू और वार्डों को संक्रमण मुक्त बनाने के लिए सरकार ने एसओपी जारी की थी, जिसकी पालना कड़ाई से की जा रही है। जनाना विंग के लिए आईसीयू और मॉड्यूलर ओटी के लिए भी प्रयास कर रहे हैं।”
-डॉ. सुरेंद्र वर्मा, प्रिंसिपल, एसपीएमसी