मूंग की 100% सरकारी खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर भोपाल पहुंचे करीब 2 हजार किसान मंगलवार रात होशंगाबाद रोड पर डटे हुए हैं। CM हाउस घेरने जा रहे किसानों को पुलिस ने वीर सावरकर सेतु से पहले CSIR-AMPRI (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च- एडवांस मैटेरियल एंड प्रोसेसेज रिसर्च इंस्टीट्यूट) के सामने रोक दिया। किसान सड़क पर बैठ गए हैं। आंदोलन के चलते नर्मदापुरम रोड पर ट्रैफिक प्रभावित है और पुलिस ने वैकल्पिक रूट जारी किए हैं। किसान नेताओं ने ऐलान किया है कि वे रात सड़क पर ही गुजारेंगे और बुधवार सुबह मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करेंगे। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। किसान आंदोलन के चलते ट्रैफिक डायवर्ट किसानों के धरना प्रदर्शन के चलते पुलिस ने ट्रैफिक डायवर्जन किया है। आरआरएल तिराहा ब्रिज के उतार से नर्मदापुरम मार्ग पर यातायात प्रभावित है। वाहन चालकों के लिए वैकल्पिक रूट जारी किए गए हैं। होशंगाबाद रोड, एम्स, कटारा हिल्स में जाम किसान आंदोलन के चलते भोपाल में ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। होशंगाबाद रोड, एम्स, बंसल प्लाजा और कटारा हिल्स रोड समेत कई जगह जाम की स्थिति बन गई। 11 मील से ट्रैफिक डायवर्ट किए जाने के कारण कटारा हिल्स रोड पर करीब 3 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। वाहन रेंग-रेंगकर चलते रहे और बड़ी संख्या में लोग परेशान हुए। किसानों को रोकने वाटर कैनन लगाई, बीच सड़क बसें खड़ी कीं इससे पहले पुलिस ने होशंगाबाद रोड पर वाटर कैनन तैनात कर कई बसें बीच सड़क पर खड़ी कर दीं। एडिशनल एसपी अनिल शर्मा ने कहा- किसानों को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और यह किसानों का आखिरी पॉइंट तय किया गया है। इससे पहले कई जगह पुलिस और किसान आमने-सामने आ गए थे। पुलिस किसानों को आगे बढ़ने से रोकती रही, जबकि किसान आगे जाने की मांग पर अड़े रहे। देखिए तस्वीरें 11 मील पर बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़े थे किसान इससे पहले 11 मील बायपास पर पुलिस और किसानों के बीच बैरिकेडिंग को लेकर धक्का-मुक्की हुई थी। पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे, लेकिन किसान बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ गए। इसके बाद किसान 11 मील से मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच कर गए। किसानों के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहन भी चल रहे थे। 7 दिन का राशन-पानी लेकर पहुंचे किसान भोपाल कूच में शामिल किसान लंबी लड़ाई की तैयारी के साथ पहुंचे हैं। वे ट्रैक्टर-ट्रॉली में सात दिन का राशन और पानी लेकर आए हैं। कई किसान दाल-बाटी भी बनाकर साथ लाए हैं। किसानों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा और वे किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं। हाथों में तिरंगा, लगाए 'जय जवान-जय किसान' के नारे भोपाल में प्रवेश के बाद किसान हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़े। इस दौरान वे लगातार 'जय जवान-जय किसान' के नारे लगाते रहे। किसानों के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों का काफिला भी शहर में आगे बढ़ता रहा। 19 किसान संगठन आंदोलन में शामिल
संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में प्रदेश के 19 किसान संगठन इस आंदोलन में शामिल हैं। सोमवार को बरखेड़ा से शुरू हुई किसान क्रांति पैदल यात्रा मंगलवार को औबेदुल्लागंज, मंडीदीप और 11 मील होते हुए भोपाल पहुंची। रास्ते में कई जगह पुलिस ने किसानों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन किसान बैरिकेडिंग हटाते हुए आगे बढ़ते रहे। किसान नेताओं ने सरकार को घेरा देश का पेट भर रहे हैं, क्या गुनाह कर रहे हैं हम? भोपाल कूच के दौरान किसान नेताओं ने सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि किसान कोई अपराध नहीं कर रहे हैं, बल्कि देश का पेट भर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद पदाधिकारियों को डिटेन किया गया और जगह-जगह बैरिकेड लगाए गए। किसान नेताओं ने मूंग खरीदी और MSP का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसानों की पूरी मूंग नहीं खरीदी जा रही। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संसद में MSP थी, है और रहेगी कहा गया, तो किसानों को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा। 'दिल्ली में छोटे-छोटे कॉकरोच देखे, अब उनके बाप भोपाल आए हैं'
भोपाल कूच के दौरान किसान नेता ने कहा, "दिल्ली में छोटे-छोटे कॉकरोच उन्होंने देख लिए, अब उनके बाप कॉकरोच भोपाल में आए हैं, अब देखिएगा क्या होगा भोपाल में।" उन्होंने कहा कि किसान कोई गुनाह नहीं कर रहे हैं और शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद पदाधिकारियों को डिटेन करने व बैरिकेड लगाने पर सवाल उठाए। सीएम ने अफसरों और कृषि मंत्री के साथ की बैठक किसान आंदोलन को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को सीएम हाउस में अफसरों और कृषि मंत्री के साथ बैठक की। बैठक में किसानों की मांगों और आंदोलन की स्थिति को लेकर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और जरूरी व्यवस्थाओं को लेकर निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने ऑनलाइन खाद वितरण व्यवस्था को सही ठहराया किसान आंदोलन के बीच खाद वितरण व्यवस्था को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट ने कृषि आदान विक्रेता संघ की याचिका खारिज करते हुए मध्यप्रदेश में ई-विकास (उर्वरक वितरण) प्रणाली के तहत ऑनलाइन खाद वितरण व्यवस्था को सही ठहराया है। हाईकोर्ट ने कहा कि कालाबाजारी, जमाखोरी और उर्वरकों के गैर-कृषि उपयोग को रोकने के लिए लागू यह केंद्र सरकार का नीतिगत फैसला है, जिसमें सीमित परिस्थितियों में ही न्यायिक दखल दिया जा सकता है। याचिका में ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट नेटवर्क और ई-टोकन व्यवस्था के कारण किसानों और उर्वरक विक्रेताओं को होने वाली परेशानी का हवाला दिया गया था। लाइव ब्लॉग के मिनट टु मिनट अपडेट के लिए यहां से गुजर जाइए…