कोटा मेडिकल कॉलेज परिसर में 40 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा मैटरनल एंड चाइल्ड सेंटर शुरू होते ही हाड़ौती क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इससे नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं और नए कोटा क्षेत्र के मरीजों को सीधा फायदा मिलेगा। इस सेंटर में 100 बेड हैं, लेकिन 225 बेड तक इसे बढ़ाया जा सकता है। इसका काम तेजी से चल रहा है। भवन का काम पूरा हो चुका है, मशीनरी भी लगभग लग रही है। दो से तीन महीने में यह मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रशासन को सुपुर्द कर दिया जाएगा। रेफर होने वाले बच्चों को मिलेगी बड़ी राहत अभी हाड़ौती संभाग के कई छोटे अस्पतालों और सीएचसी-पीएचसी से गंभीर नवजात और प्रसूता केस सीधे जेकेलोन अस्पताल रेफर किए जाते हैं। नए कोटा क्षेत्र और इस रूट से कोटा आने वाले मरीजों मां और नवजातों को मेडिकल कॉलेज लेकर आया जाता है। लेकिन यहां भी आईपीडी फुल होने की वजह से कई बार सुविधाएं नहीं मिलने की वजह से जेके लोन अस्पताल ही रेफर कर देते है। ऐसे केस सीधे इस सेंटर में एडमिट किए जा सकेंगे। समय पर इलाज मिलने से नवजात मृत्यु दर कम करने में मदद मिलेगी। हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी और प्री मैच्योर बेबी के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होगी। नए कोटा क्षेत्र के लोगों को मिलेगा नजदीक इलाज कोटा शहर का विस्तार तेजी से नए क्षेत्रों में हुआ है। इन इलाकों के लोगों को अभी दूर स्थित जेके लोन अस्पताल में जाना पड़ता है। प्रसूता महिलाओं को समय पर इलाज में दिक्कत होती है। इस सेंटर के शुरू होने के बाद नए कोटा के हजारों परिवारों को नजदीक बेहतर इलाज मिलेगा। इमरजेंसी में समय की बचत होगी। महिलाओं और बच्चों के लिए विशेषीकृत सेवाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी। अभी मेडिकल कॉलेज में रोज की महिला एवं बाल रोग डिपार्टमेंट में 500 की ओपीडी है। वहीं, गायनिक वार्ड में स्थिति यह है कि कई बार बेड नहीं मिलते। जेकेलोन अस्पताल पर कम होगा दबाव फिलहाल कोटा और आसपास के क्षेत्रों के अधिकांश गायनी और नवजात केस इसी अस्पताल पर निर्भर हैं, जिससे लगातार भीड़ बनी रहती है। संसाधनों पर दबाव बढ़ता है। यह सेंटर शुरू होने के बाद मरीजों का लोड बंटेगा। जेकेलोन में भी सेवाएं और बेहतर हो सकेंगी। गंभीर केस को अधिक फोकस के साथ संभाला जा सकेगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा अस्पताल यह सेंटर केवल एक नई बिल्डिंग नहीं, बल्कि आधुनिक हेल्थकेयर का सेंटर होगा। इसमें लेबर-डिलीवरी-रिकवरी कॉन्सेप्ट पर लेबर रूम, अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, कॉटेज वार्ड, सामान्य वार्ड, एयर कंडीशंड परिसर, बच्चों के लिए एनआईसीयू समेत तमाम इलाज की सुविधाएं रहेगी। 225 बेड तक विस्तार की क्षमता रहेगी। अभी इसे 100 बेड के रूप में तैयार किया जा रहा है। बूंदी, बारां, झालावाड़ जैसे जिलों के मरीजों को भी इसका फायदा मिलेगा।