कोटा में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर की अधिकारियों के साथ चल रही बैठक में अचानक बिजली गुल हो गई। इसके चलते मंत्री जिला परिषद सभागार में करीब 6 मिनट तक अंधेरे में बैठे रहे। बाद में जनरेटर चालू कर लाइट बहाल की गई। इस बैठक में जिला परिषद के तमाम अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। बैठक दोपहर करीब सवा एक बजे शुरू हुई। मीटिंग शुरू होने के कुछ ही देर बाद, जब मंत्री नागर सड़कों के निर्माण को लेकर अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे, तभी हॉल की बत्ती गुल हो गई। हालांकि, बिजली जाने के बाद भी चर्चा रुकी नहीं और जारी रही। सभागार के कर्मचारियों ने तुरंत खिड़कियों के पर्दे हटा दिए ताकि अंदर प्राकृतिक रोशनी आ सके। वहीं, बाहर मौजूद कर्मचारी जनरेटर चालू करने की मशक्कत में जुट गए। इस तरह करीब 6 मिनट तक सभागार की लाइट बंद रही। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने रविवार को जिला परिषद सभागार में सांगोद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत चल रहे विभिन्न विकास कामों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने कुछ अधिकारियों की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि काम को टालने की प्रवृत्ति को तुरंत बंद किया जाए। काम को लटकाने की जगह अधिकारी कर्मचारी तय समय पर काम को पूरा करें। विकास कार्यों की मॉनिटरिंग को मजबूत करने के लिए उन्होंने एक नया फॉर्मूला दिया। पंचायतों के कलक्टर बनाकर जेईएन की डयूटी लगाएं
इसके तहत तीन-तीन पंचायतों का क्लस्टर बनाकर जेईएन की डयूटी लगाने और ग्राम पंचायत मुख्यालय पर ही उनके बैठने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कमल कुमार मीणा समेत अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में ऊर्जा मंत्री ने खेतों के रास्तों और श्मशान घाटों की स्थिति को लेकर विस्तार से समीक्षा की। अधिकारियों से कहा, बरसात के मौसम में किसी भी गांव से यह दुखद समाचार नहीं आना चाहिए कि तिरपाल डालकर अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। उन्होंने हर हाल में श्मशान तक ठीक रास्ते बनाने के लिए निर्देश दिए। मंत्री नागर ने कहा कि श्मशानों में टीन शेड की जगह पर अब आरसीसी का मॉडल अपनाया जाए, जिसमें स्लैब और सरिये का उपयोग हो।हर गांव में श्मशान की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तुरंत सर्वे करने और जहां जरूरत हो वहां जमीन आवंटित करने के निर्देश दिए। निर्माण कामों में नई तकनीक का हो उपयोग मंत्री नागर ने बैठक में निर्देश दिए कि इंटरलॉकिंग और सीसी रोड के साथ पत्थर से 'वी-शेप' की मजबूत नालियों का निर्माण किया जाए। जो नालियां 60% तक डैमेज हो चुकी हैं, उन्हें तोड़कर दोबारा बनाया जाए और उनमें पत्थर का उपयोग किया जाए। नागर ने अधिकारियों को लीक से हटकर सोचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कहीं पर भी पत्थर की चारदीवारी न बनाई जाए, क्योंकि इसमें चार गुना अधिक लागत आती है और यह जल्दी खराब भी हो जाती है। इसके स्थान पर आधुनिक और नई तकनीक का प्रयोग किया जाए। इसी तरह, उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि सामुदायिक केंद्रों को भारी-भरकम बजट से आरसीसी का बनाने के बजाय 17-18 फीट ऊंचे टीन शेड लगाकर विशाल डोम के रूप में तैयार किया जाए। इससे लागत काफी कम आएगी और जगह की उपयोगिता भी अधिक हो सकेगी। बैठक के दौरान ग्रामीण विकास, पंचायती राज और सीएसआर के कामों के साथ साथ लटूरी में गोवर्धन परियोजना के तहत तैयार गोबर गैस प्लांट को लेकर भी चर्चा की गई इस प्लांट से भविष्य में गैस सिलेंडर भरवाए जाने की कार्ययोजना पर अधिकारियों से रोडमैप मांगा गया।