कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती 2 और महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई। किडनी फेल होने पर उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया है। इससे पहले सिजेरियन डिलीवरी के बाद 2 महिलाओं की मौत हो चुकी है। कई की किडनी फेल है। वहीं अब जेके लोन अस्पताल से भी एक मामला सामने आया है। यहां सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई। 8 मई की रात 10 बजे कलेक्टर और एडीएम सिटी ने प्राइवेट हॉस्पिटल पहुंचकर महिलाओं की स्थिति के बारे में जानकारी ली थी। दो डॉक्टर सहित 4 पर कार्रवाई हॉस्पिटल प्रशासन ने ऑपरेटिंग सर्जन असिस्टेंट प्रोफेसर (गायनेकोलॉजी) डॉ. श्रद्धा की सेवाएं बर्खास्त कर दी हैं। वह संविदा पर मेडिकल कॉलेज में तैनात थीं। इमरजेंसी ओटी के ऑफिसर इंचार्ज एसोसिएट प्रोफेसर (सर्जरी) डॉ. नवनीत शर्मा, ऑपरेशन थिएटर की सिस्टर इंचार्ज गुरजीत कौर और लेबर रूम की सिस्टर इंचार्ज निमेश वर्मा को सस्पेंड कर दिया है। दवाओं-उपकरणों के उपयोग पर रोक ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने गायनी वार्ड में (ऑपरेशन के बाद) उपयोग होने वाली 24 तरह की दवाओं, उपकरणों के उपयोग पर रोक लगा दी है। ये वो दवाएं हैं, जो सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं को दी गई थीं। 4 दिन में 8 महिलाओं की हालत बिगड़ी इससे पहले न्यू मेडिकल हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक-एक कर 6 महिलाओं की तबीयत बिगड़ी थी। इनमें से 2 महिलाओं की मौत हो चुकी है। न्यू मेडिकल हॉस्पिटल में पिछले 4 दिन में कुल 8 महिलाओं की हालत बिगड़ी है। सभी महिलाओं की एक ही ओटी में सर्जरी हैरानी की बात यह है कि 6 महिलाओं की तबीयत बिगड़ने की जानकारी होने के बाद भी 2 और महिलाओं को उसी EOT (इमरजेंसी ओटी) में ले जाया गया। किरण की सिजेरियन डिलीवरी कराई और 6 महीने की गर्भवती (प्रेग्नेंट) शिरीन को टांके लगाए गए। इसके बाद इन दोनों की भी तबीयत बिगड़ गई। इधर चार दिन बाद भी जांच टीम महिलाओं की हालत बिगड़ने के कारण को नहीं ढूंढ पाई है। पहले जानिए आखिर क्या है मामला 3 मई को सिजेरियन डिलीवरी के बाद शाम 5.40 बजे सुशीला, 4 मई की तड़के 3:30 बजे चन्द्रकला, सुबह 11.43 बजे रागिनी, दोपहर 12. 58 बजे पायल, दोपहर 1.35 बजे ज्योति, दोपहर 4.03 बजे धन्नी को पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में भर्ती किया गया था। 4 मई की रात 12 बजे के आसपास सबसे पहले पायल की तबीयत बिगड़ी थी। उसके बाद 5 अन्य महिलाओं की तबीयत बिगड़ी थी। 48 घंटे में पायल व ज्योति ने दम तोड़ दिया था। सभी मरीजों में एक जैसी समस्या थी। अब दो नए मामले सामने आए 5 मई को हॉस्पिटल में भर्ती हुईं दो अन्य महिलाओं के भी यूरिन बंद होने और किडनी में इंफेक्शन की शिकायत सामने आई है। इनमें एक की सीजेरियन डिलीवरी हुई है। दूसरी 6 महीने से गर्भवती महिला के बच्चेदानी में टांके लगे हैं। तबीयत बिगड़ने पर एक महिला को 7 मई की शाम साढ़े 7 बजे और दूसरी महिला को 8 मई की सुबह 11 बजे प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया। दोनों महिलाओं की प्राइवेट हॉस्पिटल में डायलिसिस हुई है। 2 बार नॉर्मल डिलीवरी हुई, तीसरी बार में सिजेरियन कोटा के कसार की रहने वाली किरण (26) की दो बेटियां हैं। दोनों न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में नॉर्मल डिलीवरी से हुई हैं। तीसरी डिलीवरी के लिए किरण को 5 मई की रात 9:30 बजे न्यू मेडिकल हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। भाई लोकेश ने बताया- हॉस्पिटल स्टाफ ने नॉर्मल डिलीवरी के लिए बोला था। 6 मई की रात को किरण को दर्द हुआ। रात 10-11 बजे उसकी सिजेरियन डिलीवरी कराई गई। 18 घंटे बाद यूरिन बंद लोकेश (किरण का भाई) ने बताया कि 7 मई की शाम तक किरण की तबीयत ठीक थी। शाम 6 बजे बाद यूरिन बंद हो गया। बीपी लो हो गया। हाथ-पैरों में दर्द होने लगा। रात 12 बजे बाद किरण दर्द से तड़पने लगी। स्टाफ ने प्लेटलेट्स डाउन होना बताया। हॉस्पिटल में मौजूद स्टाफ ने प्राइवेट हॉस्पिटल में ले जाने की सलाह दी। अगले दिन 8 मई को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कराया गया। सुबह 11 बजे उसे प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। उसकी डायलिसिस करनी पड़ी। अब तक 40 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं। रात को कलेक्टर साहब आए थे, उन्होंने निशुल्क इलाज का आश्वासन दिया है। बच्चेदानी में टांके लगाए कोटा के शिवपुरा की रहने वाले मोहम्मद आशु ने बताया कि उसकी पत्नी शिरीन (20) 6 महीने की गर्भवती है। दर्द होने पर 5 मई की सुबह 9:30 बजे उसे न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल लाए। जांच के बाद डॉक्टर ने बताया की शिरीन के बच्चेदानी का मुंह खुला हुआ। टांके लगाने पड़ेंगे। दोपहर 12 बजे उसे भर्ती किया। डॉक्टर ने दवा व सूचर (टांके लगाने का धागा ) लिखा, जो बाहर से खरीद कर लाए। 6 मई की सुबह ओटी में लेने को कहा था। दोपहर करीब डेढ़ बजे ओटी में लिया। टांके लगाने के बाद शिरीन को वार्ड में शिफ्ट किया। 12 घंटे बाद ब्लड आने लगा अगले दिन 7 मई की सुबह करीब 4 बजे शिरीन की तबीयत बिगड़ने लगी। उसके हल्का ब्लड निकलने लगा। स्टाफ ने नॉर्मल बताया। सुबह 7 बजे खून ज्यादा बह रहा था, शिरीन का बीपी व प्लेटलेट्स डाउन हो गई। बुखार आ गया। काफी देर तक स्टाफ ने नहीं संभाला। सीनियर डॉक्टर भी नहीं आए। आखिर में दोपहर 1 बजे के आसपास शिरीन को SICU में शिफ्ट किया गया। वहां स्टाफ ने जांच की, लेकिन इन्फेक्शन नहीं बताया। शिरीन के यूरिन बंद हो गया। डॉक्टर ने बॉडी में इन्फेक्शन बताया आशु ने बताया कि शाम होते-होते स्टाफ ने दूसरी जगह ले जाने को कहा। शाम 7:30 बजे उसे डिस्चार्ज करवाकर प्राइवेट हॉस्पिटल में लाए। प्राइवेट हॉस्पिटल में डॉक्टर ने बॉडी में इन्फेक्शन होना बताया। 8 मई को शिरीन की डायलिसिस हुई। करीब 50 हजार खर्च हो चुके हैं। दवाओं का खर्चा अलग है। शिरीन अभी होश में है। कलेक्टर व एडीएम ने निशुल्क इलाज करवाने का आश्वासन दिया है। आशु ने बताया की अब तक जिन 8 महिलाओं की तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई है, उन सभी की सर्जरी एक ही ओटी में हुई है। कलेक्टर ने बेहतर इलाज के दिए निर्देश एडीएम सिटी अनिल कुमार सिंघल ने बताया- दोनों महिलाएं पहले न्यू मेडिकल हॉस्पिटल में भर्ती थीं। इनको परिवार वाले प्राइवेट हॉस्पिटल में लाए हैं। दोनों की हालत स्थिर है। इन दोनों महिलाओं में भी वही लक्षण हैं, जो पूर्व में 6 महिलाओं में देखने को मिले थे। जिला कलेक्टर ने प्राइवेट हॉस्पिटल में आकर महिलाओं की स्थिति के बारे में जानकारी ली है। प्राइवेट हॉस्पिटल को कहा गया है कि महिलाओं से किसी भी तरह का चार्ज न लिया जाए। उनका बेहतर इलाज किया जाए। जयपुर से आई टीम ने जायजा लिया शनिवार सुबह जयपुर से आई 4 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों के इलाज एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया। टीम में एसएमएस हॉस्पिटल (जयपुर) के नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. धनंजय अग्रवाल भी शामिल हैं। SSB में वर्तमान में चार महिलाएं भर्ती हैं। इनमें से एक धन्नी बाई की स्थिति गंभीर बनी हुई है। उसे वेंटिलेटर से हटा लिया गया है। उसमें आज निमोनिया के लक्षण दिखाई दिए हैं। बाकी तीन में से दो रागिनी और सुशीला की रिकवरी है। अभी स्थिति खतरे से बाहर नहीं है। एक मरीज चंद्रकला की स्थिति स्थिर है। हालांकि सभी मरीजों की स्थिति पर विशेषज्ञ डॉक्टर्स द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है, उन्हें अभी पूर्ण रूप से खतरे से बाहर नहीं माना जा सकता। अब जेके लोन अस्पताल में डिलीवरी के बाद इन्फेक्शन
न्यू मेडिकल कॉलेज के गायनिक विभाग के बाद अब जेके लोन अस्पताल से भी एक मामला सामने आया है। छावनी इलाके की रहने वाली आरती को 6 मई को जेके लोन अस्पताल में भर्ती कराया था। 8 मई की सुबह उसकी सिजेरियन से डिलीवरी हुई। डिलीवरी के बाद दोपहर तक उसकी तबीयत ठीक थी, लेकिन बाद में तबीयत खराब हो गई और यूरिन आना बंद हो गया। महिला रातभर परेशान होती रही। इसके बाद शनिवार को उसे न्यू मेडिकल कॉलेज के एसएसबी ब्लॉक में रेफर कर दिया गया। जहां नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती कर उसका इलाज किया जा रहा है।
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