कोटा प्रशासन ने आखिरकार नयापुरा स्थित ब्रिटिश कब्रिस्तान में मेजर चार्ल्स बर्टन की कब्र पर लगे विवादित शिलालेख को हटाने की सिफारिश कर दी है। कोटा उपखंड अधिकारी (एसडीएम) ने कलेक्टर को इसकी तथ्यात्मक रिपोर्ट दी है। इसमें उन्होंने साफ लिखा है कि ​शिलालेख पर लिखी भाषा कोटा के स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति अपमानजनक और आम जनमानस की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है। इसलिए इस शिलालेख को कब्रिस्तान से हटाना उचित होगा। उन्होंने 13 अप्रैल को रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए कलेक्टर को भेजी है। ​रिपोर्ट में लिखा कि इस शिलालेख पर कोटा रियासत के स्वतंत्रता सेनानियों के लिए उपयोग किए शब्दों का कोटा के इतिहासकार, राजनीतिज्ञ और आम व्यक्ति लगातार विरोध करते हुए इसे हटाने की मांग कर रहे हैं। इसलिए इसे हटाना उचित होगा। रिपोर्ट ​के अनुसार अभी कब्रिस्तान की देखरेख कोटा हेरिटेज सोसायटी कर रही है। शिलालेख पर सैनिकों के बारे में रक्तपिपासु और बदमाश शब्द का जिक्र किया गया है। यह विवादित शिलालेख 168 साल पहले लगाया गया था। लगातार बढ़ रहा है विरोध, इतिहासकारों ने इसे कोटा का अपमान बताया गौरतलब है कि कब्रिस्तान में मेजर बर्टन की पत्नी ने उनकी कब्र पर एक शिला पट्टिका लगवाई गई थी, जो आज भी लगी है। इसका लगातार विरोध और हटाने की मांग जोर पकड़ रही है। भारतीय इतिहास संकलन समिति, कोटा दक्षिण से भाजपा विधायक संदीप शर्मा, भाजपा नेता पंकज मेहता, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, एबीवीपी, एनएसयूआई, इंटैक सहित विभिन्न संस्थाओं और इतिहासकारों ने विवादित शिलालेख को हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि क्रांतिकारियों का अपमान कोटा के हर व्यक्ति का अपमान है। ------------------------------------ ये खबर भी पढ़े - कोटा में अंग्रेजों का कब्रिस्तान,स्मारक पर लिखा है-अंग्रेज वीर थे:1857 की क्रांति के भारतीय सिपाही खून के प्यासे और बदमाश, बदला लेंगे ‘1857 की क्रांति के भारतीय सिपाही (नायक) हत्यारे, खून के प्यासे, बदमाश और अंग्रेज वीर थे।’ कोटा शहर के बीचों-बीच नयापुरा में अंग्रेजों के कब्रिस्तान (ब्रिटिश सेमेट्री) में एक कब्र पर यह लिखा हुआ है। दुखद यह है कि क्रांति के 169 साल बाद भी इस कब्र को एक कमेटी की ओर से ऐतिहासिक स्मारक बताकर सहेजकर रखा जा रहा है। दूसरी ओर, भारतीय नायकों के फोटो तक नहीं हैं। उन्हें आज तक सम्मान नहीं मिला। खबर पढ़े