'ड्राइवर मेरा ट्रक लेकर ग्वालियर (मध्यप्रदेश) गया हुआ था....अचानक मोबाइल पर 500 रुपए का चालान कटने का मैसेज आया कि आपने गाजियाबाद में लेन का नियम तोड़ा है...जबकि मेरा ट्रक तो एमपी में था।' ‘मैं जयपुर से अजमेर अपनी कार से आना-जाना करता हूं....रविवार को छुट्टी के दिन मेरी कार घर पर ही थी। लेकिन नई दिल्ली के कुछ टोल प्लाजा पर टोल कटने के मैसेज मिले।’ राजस्थान में वाहन मालिकों को बिना किसी गलती के चालान-टोल कटने के मैसेज इसी तरह हैरान कर रहे हैं। गाड़ी राजस्थान होती है। लेकिन चालान-टोल एमपी-यूपी-गुजरात में कट रहे हैं। ये कोई स्कैम नहीं। , दरअसल, ये कुछ वाहन मालिकों का कारनामा है, जो दूसरों की नंबर प्लेट का क्लोन (डुप्लीकेट नंबर प्लेट) तैयार कर अपने वाहनों में इस्तेमाल करते हैं। गलती करने या ट्रैफिक रूल तोड़ने पर पैनल्टी (चालान) असली मालिक को भरनी पड़ती है। टोल प्लाजा पर चालाकी से निकल जाते हैं और उसका पूरा पैसा असली के फास्टैग खाते से कटता रहता है। जयपुर में बीते दिनों कई ट्रक-ट्रेलर ड्राइवर, ट्रांसपोर्ट कंपनियों के मालिक पुलिस शिकायत लेकर पहुंचे तो ऐसे मामले सामने आए। परेशानी की बात ये है कि पुलिस और प्रशासन के पास भी इसका कोई हल नहीं मिल पा रहा। भास्कर ने पड़ताल कर जाना कि आखिर कौनसी कमियों का फायदा उठाया जा रहा है और असली मालिक बिना गलती के कैसे इनका शिकार बन रहे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट.... सबसे पहले हाल ही में सामने आए ये दो मामले पढ़िए.... केस-1 : ट्रेलर खड़ा वापी गुजरात में, चालान कट रहा कोटपूतली में 18 अप्रैल 2026 को RJ-32GD 6450 नंबर के ट्रेलर मालिक सुगराम के पास मैसेज आया कि उनके वाहन का कोटपूतली में लेन तोड़ने का चालान हुआ है। इस पर सुगराम ने पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर बताया कि उनका ट्रेलर तो वापी गुजरात में खड़ा है, कोटपूतली में चालान कैसे हुआ? जब मामले की जांच की गई तो पता चला कि सुगराम के ट्रेलर की नंबर प्लेट किसी ने अपनी लोडिंग कैंपर पर लगा रखी थी। कैंपर ड्राइवर जयपुर-दिल्ली रोड से निकल रहा था, तभी ये चालान कटा। सुगराम की शिकायत दर्ज कर ली गई। कार्रवाई का भी आश्वासन दिया गया। लेकिन चालान और टोल का पूरा पैसा सुगराम को ही चुकाना पड़ा। जिला एसपी और आईजी जयपुर रेंज को भी शिकायत के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। केस-2 : कंपनी के बाहर खड़ा था ट्रक, हरियाणा पुलिस ने काटा चालान ट्रेलर नंबर RJ-32GE 0183 कोटपूतली की महेश ट्रांसपोर्ट कंपनी के नाम से रजिस्टर्ड है। 3 दिसंबर 2025 को ट्रेलर कंपनी के दफ्तर के बाहर ही खड़ा था। लेकिन अचानक हरियाणा में उसका चालान कटने का मैसेज आया। जब चालान लिंक पर क्लिक करके चेक किया गया तो पता चला कि उनके ट्रेलर की नंबर प्लेट एक पिकअप पर लगी थी। चालान तो हजार रुपए का था। लेकिन बिना किसी गलती के बावजूद ट्रांसपोर्ट कंपनी को उसका चालान भरना पड़ा। हर दिन मिल रही 20-30 शिकायतें ट्रांसपोर्ट संगठन राजस्थान के अध्यक्ष मुकेश बड़बड़वाल ने बताया कि उनके पास हर दिन 20 से 30 शिकायतें आ रही हैं। ट्रक मालिकों का कहना है कि उनका ट्रक हरियाणा में है और ट्रक का टोल और लेन सिस्टम का चालान कुछ देर पहले अजमेर रोड पर कट गया। ट्रक मालिकों के सामने सबसे बड़ी परेशानी है यह है कि चालान या टोल कटने के बाद उनके पास कोई विकल्प नहीं है। चालान कटा है तो खुद को ब्लैकलिस्ट से बचाने के लिए उन्हें भरना ही पड़ता है। कैसे करते हैं नंबर की अदला-बदली जयपुर में एक ट्रक ऑपरेटर राहुल ने बताया कि इसमें कोई गैंग शामिल हो सकती है। ये सड़क पर खड़ी गाड़ियों, पार्किंग या सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई तस्वीरों से वैध नंबर निकाल लेते हैं। कई बार कुछ लोग निजी हित के लिए ट्रक मालिक और ट्रक ड्राइवर के संपर्क में रहते हैं। पता लगाते हैं कि उस गाड़ी का नंबर ऑनलाइन जुड़ा है या नहीं, जिससे टोल या चालान कटेगा। कन्फर्म होने पर उस ट्रक का नंबर नोट कर लिया जाता है। फिर उस नंबर प्लेट का क्लोन तैयार किया जाता है। यानी फर्जी नंबर प्लेट बनाकर रख लेते हैं। इन्हें पता होता है कि इस नंबर के ट्रक में सामान दो दिन बाद भरना है या यह ट्रक कुछ दिनों बाद निकलेगा। उस समय फर्जी नंबर प्लेट लगाकर अपने वाहन को रवाना कर देते हैं। जिससे रास्ते में आने वाले किसी भी प्रकार के चालान या टोल से बच जाते हैं। इसके बाद जब वाहन ट्रैफिक नियम तोड़ता है या टोल प्लाजा से गुजरता है, तो चालान और टोल असली वाहन मालिक के नाम चला जाता है। जबकि अपराधी आराम से बिना टोल और चालान दिए हाईवे पर वाहन दौड़ाता रहता है। यह समस्या खासतौर पर उन जगहों पर ज्यादा आती है, जहां ई-चालान और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सिस्टम का उपयोग हो रहा है। जैसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस हाईवे, जयपुर-दिल्ली हाईवे। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर सबसे ज्यादा चालान लेन सिस्टम के होते हैं, जो ई-चालान होते हैं। यानी कोई ट्रक लेन तोड़ रहा है तो उसे रुकवाया नहीं जाता, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक से लैस कैमरों से तस्वीर खिंचती है और चालान उन नंबरों पर रजिस्टर्ड मोबाइल पर भेज दिया जाता है। इसी तरह फास्टैग ज्यादातर वाहन के नंबर पर ही रजिस्टर्ड होते हैं। हाईवे के टोल प्लाजा पर वाहनों के नंबरों को ही स्कैन किया जाता है, जिससे टोल असली मालिक का कटता है। पुलिस भी पता लगाने में जुटी आईजी जयपुर रेंज राहुल प्रकाश ने बताया कि सड़क सुरक्षा के संबंध में जयपुर रेंज कार्यालय में ट्रक ऑपरेटर और ट्रांसपोर्ट यूनियन की एक मीटिंग हुई थी। इस दौरान यह बिंदु सामने आया था कि हमारे बहुत सारे ऐसे ट्रक-ट्रोले का टोल दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेस हाईवे या दिल्ली मुंबई हाईवे पर कट जा रहा है, जबकि हमारी गाड़ी उस लोकेशन पर नहीं है। ऑपरेटरों का कहना था कि उनकी गाड़ी के नंबर प्लेट लगा कर टोल या चालान हो रहे हैं। ये लोग हमारी गाड़ियों के नंबर प्लेट यूज कर रहे हैं। राहुल प्रकाश ने बताया अब तक इस तरह की धोखाधड़ी में गैंग को लेकर तो कोई क्लेरिटी नहीं है। लेकिन ऐसा बार-बार होना बताया जा रहा है। कहीं न कहीं लोगों को पता है कि इस प्रकार से नंबर प्लेट बदलें तो टोल उससे लिंक मोबाइल से कट जाएगा। अगर नंबर प्लेट के साथ फास्टैग को नहीं देखा जाए तो। हमारे स्तर हमने परिहन विभाग को एक पत्र लिखा है। जांच के बाद सभी जिला एसपी को इस विषय को लेकर कार्रवाई के आदेश दिए जाएंगे। ब्लैक लिस्ट हो जाती है गाड़ी, मजबूरी में जमा कराना होता है चालान पुलिस या परिवहन विभाग के अधिकारी कितने भी चालान पर गाड़ी को ब्लैक लिस्ट कर सकते हैं। इसे लेकर कोई स्पष्ट नियम नहीं हैं। अधिकारी चाहें तो केवल पहले ओवर स्पीड चालन पर भी ब्लैक लिस्ट कर सकता है। ऐसे में असली वाहन मालिकों को इस बात का डर रहता है कि कहीं उनका ट्रक-ट्रेलर ब्लैक लिस्ट नहीं हो जाए। इससे बचने के लिए बिना गलती के बावजूद उन्हें चालान भरना पड़ता है। सरकार यह करे तो हो सकता है समाधान ट्रांसपोर्ट संगठन राजस्थान के अध्यक्ष मुकेश बड़बड़वाल ने बताया टोल पर टोल काटने के दौरान और चालान के दौरान फास्टैग और गाड़ी नंबर को मैच किया जाना चाहिए, जिससे ऐसी धांधली को रोका जा सकता है। ऐसा करने से अगर कोई फर्जी नंबर प्लेट लगाकर वाहन चला भी रहा है तो उसे पकड़ा भी जा सकेगा। वहीं, ट्रक मालिक को चालान के बाद सुनवाई का समय दिया जाना चाहिए, ताकि एविडेंस देकर ऐसे जुर्माने को हटाया जा सके। इससे बेगुनाहों को राहत मिल सकेगी। बिना हाई सिक्योरिटी प्लेट में ही ऐसी परेशानी- एक्सपर्ट विरेन्द्र सिंह राठौड़ (आरटीओ सड़क सुरक्षा) ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति आपकी गाड़ी का नंबर लेकर खुद की गाड़ी में गलत उपयोग कर रहा है तो आप को सबसे पहले उस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी चाहिए। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट जरूरी की हुई है। अगर किसी ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लगाई तो उस पर पुलिस और परिवहन विभाग मिलकर कार्रवाई करें। ये शिकायत कई बार सामने आती है। अधिकांश गड़बड़ी उन वाहनों में होती है जिनमें हाई सिक्योरिटी प्लेट नहीं होती।