सलूंबर के लसाड़िया और झल्लारा इलाके में एक के बाद एक 8 बच्चों की रहस्यमयी मौत के बाद प्रशासन ने झोलाछापों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई। टीम ने छापेमारी कर 4 अवैध क्लीनिकों सील कर दिया है। इनमें से 3 क्लीनिक लसाड़िया उपखंड मुख्यालय पर धड़ल्ले से चल रहे थे। वहीं, 1 क्लीनिक आंजणी इलाके में पकड़ा गया। गुरुवार शाम 5 बजे सरकारी गाड़ियों का काफिला बाजार में पहुंचा। अवैध रूप से दुकान चला रहे झोलाछापों में हड़कंप मच गया। कार्रवाई के डर से कई झोलाछाप अपनी दुकानें खुली छोड़कर मौके से भाग गए। इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए प्रशासन ने एक मजबूत टीम तैयार की थी। इसमें लसाड़िया तहसीलदार रामजीलाल गुर्जर, सीआई भरत सिंह राजपुरोहित, डॉक्टर गौरव परमार और ड्रग इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह खुद मैदान में उतरे। टीम ने इन क्लीनिकों की जांच की तो इलाज के नाम पर लीपापोती हो रही थी। कलेक्टर ने दिए कार्रवाई के आदेश सलूंबर कलेक्टर मुहम्मद जुनैद पी पी ने साफ निर्देश दिए हैं कि लोगों की जान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी झोलाछाप को बख्शा नहीं जाए। इसी आदेश के बाद गुरुवार को लसाड़िया क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की गई। इलाके में करीब 7 साल बाद इस स्तर की कोई बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। झोलाछाप के चक्कर में सरकारी हॉस्पिटल नहीं जाते ग्रामीण सीएमएचओं महेन्द्र परमार ने बताया- इन झोलाछापों ने इलाके में अपनी जड़ें इतनी गहरी जमा ली हैं कि ग्रामीण सरकारी अस्पताल जाने के बजाय इनके पास जाना बेहतर समझते हैं। ये झोलाछाप बिना किसी जांच या डिग्री के मरीजों को हाई डोज दवाइयां और धड़ाधड़ इंजेक्शन दे रहे हैं। मामूली बीमारी में भी ग्लूकोज चढ़ा देते हैं मोटी कमाई के चक्कर में मामूली बीमारी होने पर भी मरीजों को ग्लूकोज की बोतलें चढ़ा दी जाती हैं। इलाज का यह तरीका मरीजों की जान के लिए सबसे बड़ा खतरा है। यह अभियान रुकने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में अन्य गांवों में भी झोलाछाप डॉक्टरों पर इसी तरह शिकंजा कसा जाएगा। इनपुट - भेरूलाल आमेटा, लसाड़िया।