उत्तर पश्चिम रेलवे (एनडब्ल्यूआर) में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत कर्मचारियों के सत्यापन में सामने आया कि कुल 6,671 कर्मचारियों में से 1,746 का आपराधिक रिकॉर्ड है। इनमें से 17 कर्मचारी हत्या और लूट जैसे गंभीर अपराधों में शामिल पाए गए, जिन्हें सिस्टम से हटा दिया गया है। यह स्थिति रेलवे में सुरक्षा व्यवस्था और ठेकेदारों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बीकानेर मंडल में चलती ट्रेन में हुई हत्या की घटना के बाद रेलवे बोर्ड ने सख्ती दिखाते हुए कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का सत्यापन शुरू किया। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के जरिए जांच में सामने आया कि चारों मंडलों-जयपुर, जोधपुर, अजमेर और बीकानेर में औसतन हर चौथा कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी किसी न किसी आपराधिक गतिविधि से जुड़ा रहा है। इसके बाद कोच अटेंडेंट के लिए पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है। कहां, कितने संदिग्ध कर्मचारी मिले NWR के मंडलों में जांच के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध कर्मचारी सामने आए जांच में यह भी सामने आया कि कई ठेकेदारों ने बिना ठोस सत्यापन के कर्मचारियों को नियुक्त किया, जिससे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग सीधे यात्रियों के संपर्क में आ गए। सोशल मीडिया पर लगातार यात्रियों की शिकायतें आ रहीं आधिकारिक आंकड़ों के साथ ही सोशल मीडिया पर भी यात्रियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कोच अटेंडेंट द्वारा दुर्व्यवहार, अवैध वसूली और झगड़े के मामले जयपुर, जोधपुर, अजमेर और बीकानेर से गुजरने वाली ट्रेनों में रिपोर्ट किए गए हैं। हाल ही में जोधपुर स्टेशन पर एक ठेकेदार कर्मचारी द्वारा महिला यात्री का पर्स लेकर भागने का मामला सामने आया, जिसमें आरोपी को पकड़कर जीआरपी को सौंपा गया। RPF आईजी ने कहा- कर्मचारियों का बैकग्राउंड चेक कर सख्त कार्रवाई की आरपीएफ आईजी ज्योति कुमार सतीजा और सीपीआरओ अमित सुदर्शन के अनुसार, रेलवे बोर्ड के निर्देश पर करीब चार माह में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का डेटा अपलोड किया गया। एनसीआरबी ने इनमें से कर्मचारियों का सत्यापन किया, जिसमें 25 के खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड मिला। इनमें से 17 गंभीर मामलों में शामिल कर्मचारियों को हटा दिया गया है। रेलवे ने सुरक्षा मजबूत करने के लिए एनसीआरबी के डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग शुरू किया है, जिससे सभी प्रकार के कर्मचारियों का बैकग्राउंड चेक किया जाएगा।