महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के ई-केवाईसी नहीं करवाने वाले मजदूरों का नाम कट जाएगा। इसके लिए 25 अप्रैल 2026 की समय सीमा समाप्त होने के बाद, बिना केवाईसी वाले जॉब कार्डों को अवैध मानकर निरस्त किया जा सकता है। क्यों जरूरी है ई-केवाईसी सरकार का मुख्य उद्देश्य 'घोस्ट बेनिफिशियरी' (फर्जी लाभार्थियों) को सिस्टम से बाहर करना है। ई-केवाईसी के माध्यम से श्रमिक के आधार कार्ड का मिलान उनके जॉब कार्ड से किया जाता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि मजदूरी का पैसा सीधे वास्तविक मजदूर के बैंक खाते में जाए। डुप्लीकेट जॉब कार्ड की समस्या को खत्म किया जा सके। निरस्त होने का खतरा विभागीय निर्देशों के अनुसार, यदि 25 अप्रैल तक किसी मजदूर की पहचान का सत्यापन नहीं होता है, तो सिस्टम उन्हें 'निष्क्रिय' श्रेणी में डाल देगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि मजदूर को भविष्य में मस्टर रोल पर काम नहीं मिलेगा। उनका नाम स्थायी रूप से लाभार्थी सूची से हटाया जा सकता है। रुकी हुई मजदूरी के भुगतान में तकनीकी बाधाएं आ सकती हैं। कैसे कराएं ई-केवाईसी श्रमिकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि प्रक्रिया सरल रखी गई है। मजदूर अपने क्षेत्र के रोजगार सहायक या पंचायत सचिव से संपर्क कर अपना अंगूठा लगाकर या ओटीपी के जरिए सत्यापन करा सकते हैं। नजदीकी ग्राहक सेवा केंद्र पर जाकर भी आधार अपडेट कराया जा सकता है। बिना ई-केवाईसी के 25 अप्रैल के बाद मस्टर रोल में नाम दर्ज होना नामुमकिन होगा। अपनी पात्रता बचाए रखने के लिए आज ही पहल करें।