राजकीय मेडिकल कॉलेज (GMC) चित्तौड़गढ़ में मेस संचालन को लेकर चल रहा विवाद अब सीधे स्टूडेंट्स की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाल रहा है। पिछले तीन दिनों से मेस पूरी तरह बंद है, जिससे हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को खाने के लिए बाहर जाना पड़ रहा है या कई बार बिना खाए ही काम चलाना पड़ रहा है। मेडिकल जैसे कठिन कोर्स में पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स के लिए यह स्थिति और ज्यादा मुश्किल हो गई है, क्योंकि उनके पास पहले ही समय की कमी रहती है। सुबह से लेकर देर रात तक पढ़ाई और प्रैक्टिकल के बीच अब खाना ढूंढना भी एक बड़ी समस्या बन गया है। पुराने ठेकेदार को हटाने पर सवाल जानकारी के अनुसार, हाल ही में मेस के लिए नया टेंडर निकाला गया था, लेकिन इसमें पूरी प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया। नियम यह है कि अगर टेंडर में तीन से कम आवेदन आते हैं तो पुराने ठेकेदार का काम जारी रखा जाता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ। आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने बिना सूचना दिए पुराने ठेकेदार को हटा दिया और उसी रेट पर दूसरे व्यक्ति को काम दे दिया। पूर्व संवेदक का कहना है कि वे काम जारी रखने को तैयार थे, फिर भी उन्हें हटाया गया। वहीं कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. प्रमोद तिवारी का कहना है कि पुराना ठेकेदार खुद काम नहीं करना चाहता था, इसलिए नई व्यवस्था करनी पड़ी। स्टूडेंट्स सड़क पर उतरे मेस बंद होने के साथ-साथ अन्य समस्याओं ने भी स्टूडेंट्स का गुस्सा बढ़ा दिया है। गुरुवार सुबह छात्र हड़ताल पर उतर आए और कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना है कि सिर्फ मेस ही नहीं, बल्कि हॉस्टल में पीने के पानी और सफाई की समस्या भी लंबे समय से बनी हुई है। कई बार लिखित में शिकायत देने के बावजूद भी कोई सुधार नहीं हुआ। अब जब मेस भी बंद हो गई, तो स्टूडेंट्स ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। जांच की मांग इस पूरे मामले में कॉलेज प्रबंधन और स्टूडेंट्स के बीच बयान अलग-अलग हैं। स्टूडेंट खुद को हड़ताल पर बता रहे हैं, जबकि प्रिंसिपल का कहना है कि छात्र हड़ताल पर नहीं हैं और स्थिति सामान्य है। स्टूडेंट्स और पूर्व ठेकेदार दोनों ने इस मामले की जांच की मांग की है, ताकि यह साफ हो सके कि टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है या नहीं। फिलहाल सबसे ज्यादा परेशानी छात्रों को झेलनी पड़ रही है, जिनकी पढ़ाई और दैनिक जरूरतें दोनों प्रभावित हो रही हैं।