राजस्थान के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के.सी.ए. अरुण प्रसाद ने 10 से 12 मई तक मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान वन्यजीव संरक्षण, जल प्रबंधन, ईको-टूरिज्म और शिकार आधार संवर्धन कार्यों की समीक्षा की गई। निरीक्षण में कोटा वन्यजीव सर्किल और संबंधित वन अधिकारियों की टीम भी मौजूद रही। सीसीएफ सुगनाराम जाट ने बताया कि पहले दिन अधिकारियों ने दौलतगंज में विकसित हो रहे नए सफारी मार्ग, बोरावास रेंज मुख्यालय और सेलजर क्षेत्र का दौरा किया। यहां चंबल नदी से सौर ऊर्जा के जरिए 28 प्राकृतिक जल स्रोतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की सराहना की अधिकारियों ने जल स्रोतों की निगरानी के लिए सोलर सीसीटीवी लगाने के निर्देश दिए। दूसरे दिन भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य में चूलिया फॉल्स, प्लांट माइक्रो रिजर्व और अन्य जैव विविधता क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान चंबल नदी में ऊदबिलाव और व्हाइट-रम्प्ड गिद्धों की नेस्टिंग देखी गई। अधिकारियों ने लैंटाना हटाने और प्राकृतिक पुनर्जनन कार्यों को प्रभावी बताया। तीसरे दिन 82 वर्ग किलोमीटर टाइगर एनक्लोजर और गोलबाव क्षेत्र का निरीक्षण हुआ। केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए करीब 70 चीतलों के सफल अनुकूलन की समीक्षा की गई। हाल ही में सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर से छोड़ी गई( री-वाइल्डेड) बाघिन MT-7 का व्यवहार सामान्य और अनुकूल पाया गया। वहीं बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लाई गई बाघिन MT-10 की गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को वैज्ञानिक तरीके से सतत मॉनिटरिंग जारी रखने के निर्देश दिए गए। ------------------------------- ये खबर भी पढ़े- मुकंदरा के जंगल में घूम रही बाघिन ने किया शिकार:अपना इलाका बनाना शुरू किया, 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही कोटा के मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में खुले जंगल में रिलीज की गई बाघिन MT-7 ने पहला शिकार किया है। साथ ही उसने टेरिटरी बनाना भी शुरू कर दिया। वन विभाग के अनुसार बाघिन की 24×7 मॉनिटरिंग की जा रही है। इसके लिए फील्ड पेट्रोलिंग टीम रेडियो-टेलीमेट्री, रेडियो कॉलर से मिलने वाले GPS सिग्नल और कैमरा ट्रैप की मदद ले रही है। खबर पढ़े