शहर में सड़कों और फुटपाथों पर जीवन बसर कर रहे घुमंतु और अर्द्ध-घुमंतु परिवारों (गाडौलिया लोहार और कालबेलिया समाज) के पुनर्वास के नाम पर एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। नगर निगम और उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने हाल ही में शहर के विभिन्न इलाकों में सर्वे करवाकर 120 बेघर परिवारों की सूची तैयार की है। अब इन्हें सरकार की ओर से पक्के आवास या जमीन देने की तैयारी है। दैनिक भास्कर ने इस सूची का वर्ष 2010 के तत्कालीन नगर विकास प्रन्यास (अब यूडीए) के भूखंड आवंटन रिकॉर्ड से मिलान किया तो चौंकाने वाली खामी सामने आई। नए सर्वे में शामिल 15 ऐसे लोगों के नाम मिले, जिन्हें 16 साल पहले ही सरकार पुनर्वास योजना के तहत भूखंड आवंटित कर चुकी थी। इसके बावजूद नए सर्वे में इन्हें फिर बेघर और भूमिहीन मान लिया गया। सबसे बड़ी बात यह रही कि सर्वे के दौरान घर-घर जाकर आधार कार्ड, आय और अन्य जानकारी तो जुटाई गई, लेकिन विभागों ने अपने ही पुराने भूखंड आवंटन रिकॉर्ड का मिलान नहीं किया। जबकि सरकारी नियम के अनुसार एक व्यक्ति को पुनर्वास योजना में एक बार ही भूखंड का लाभ दिया जा सकता है। 2010-2026 की सूची मिलान में इन 15 लोगों के नाम आए सामने यूडीए ने 2010 में बांटे थे 95 प्लॉट लापरवाही: 4-5 दिन सर्वे चला, रिकॉर्ड ही नहीं देखा नगर निगम और यूडीए की संयुक्त टीम ने चार से पांच दिन तक शहर के अलग-अलग इलाकों में सर्वे किया। इस दौरान आधार कार्ड, परिवार के सदस्यों की संख्या, आय, वर्तमान निवास, राशन कार्ड और अन्य सामाजिक जानकारी दर्ज की गई। लेकिन यह जांच नहीं की गई कि संबंधित व्यक्ति को पहले कभी सरकार की किसी योजना में भूखंड आवंटित हुआ था या नहीं। विभागों ने पुराने आवंटन रिकॉर्ड का मिलान किए बिना ही नई पात्र सूची तैयार कर दी। वहीं 2010 में भूखंड आवंटन के बाद विभाग ने यह भी नहीं देखा कि लाभार्थियों ने वहां निर्माण कराया या नहीं, वे आवंटित भूखंड पर रह रहे हैं या नहीं और पुनर्वास योजना का वास्तविक उद्देश्य पूरा हुआ या नहीं। यदि नियमित समीक्षा होती तो ऐसी स्थिति शायद सामने नहीं आती। यूडीए और नगर निगम ने सरकार के आदेश पर घुमंतु और अर्द्ध-घुमंतु जातियों का सर्वे किया है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से भूखंड आवंटित हो चुका है तो रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी। ऐसे लोगों को दोबारा भूखंड नहीं दिया जाएगा। - अभिषेक खन्ना, आयुक्त, नगर निगम, उदयपुर