क्राइम फाइल्स पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि 29 नवंबर 2018 को मेड़ता रोड (नागौर) के बाईपुरा मोहल्ले के एक मकान में महिला की लाश मिली, एक व्यक्ति घायल था। एक कागज मिला, जिस पर लिखा था- उम्मेदा उन दोनों की मौत का जिम्मेदार है। मकान का कमरा अंदर से बंद था। ऐसे में सवाल था कि फिर इस वारदात को अंजाम देने वाला कौन था? अब पढ़िए आगे की कहानी… शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा जा चुका था। घायल लतीफ को अस्पताल में एडमिट करा दिया गया था। पुलिस को ये पड़ताल करनी थी कि आखिर लतीफ मृतका शरीफन के घर क्यों गया था? शरीफन और लतीफ पर किसने हमला किया था। इसके साथ ही पुलिस को उस कागज के टुकड़े की भी जांच करनी थी। इस मामले में पुलिस के सामने दो अलग-अलग थ्योरी थी। घायल लतीफ का कहना था कि वह तो शरीफन की मदद करने गया था। उम्मेदा ने शरीफन को मारने के बाद उस पर भी हमला कर दिया। वहीं, पुलिस के सामने एक और थ्योरी आ गई जो कुछ और ही कहानी कह रही थी। घर का दरवाजा अंदर से बंद था। अगर कोई तीसरा शख्स हत्या करके भागता, तो दरवाजा अंदर से बंद कैसे होता? इधर डॉक्टरों ने बताया कि शरीफन की मौत गला घोंटने और गर्दन पर धारदार हथियार से वार के कारण हुई थी। लतीफ के शरीर पर मौजूद घाव ऐसे थे जो खुद लगाए जा सकते थे। मृतका के बेटे से पूछताछ में सामने आया कि लतीफ का कई सालों से उसके घर पर आना जाना था। इस वारदात के 15-20 दिन पहले भी अब्दुल लतीफ उसके घर आया था। उस दौरान उसकी मां शरीफन और अब्दुल लतीफ के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। लतीफ ने उसकी मां को मारने की कोशिश की थी। मृतका के बेटे ने लतीफ पर ही उसकी मां की हत्या करने की आशंका जाहिर की। इसके साथ ही कागज के टुकड़े पर लिखे उम्मेदा नाम के शख्स के बारे में मृतका के बेटे ने बताया कि उम्मेदा का भी घर पर आना जाना था। उम्मेदा उसकी मां को जीजी कहकर पुकारता था। धीरे-धीरे इस मामले की जांच में और भी कई परतें खुलने लगीं। वारदात के बाद दुबई से आए शरीफन के पति रशीद ने बताया कि घटना से दो-तीन दिन पहले लतीफ ने उसे फोन किया थ। उसने बताया था कि शरीफन के घर उम्मेदा नाम का व्यक्ति आता-जाता है। जांच में ये भी सामने आया कि मृतका के पति रशीद को लतीफ ने ही दुबई में काम दिलाया था। लतीफ ने अस्पताल से ठीक होने के बाद एक नई कहानी सुनाई। उसने दावा किया कि जब वह शरीफन के घर पहुंचा तो उम्मेदा ने शरीफन की हत्या कर दी थी। जब उसने चिल्लाने की कोशिश की तो उम्मेदा ने उसका भी गला रेत दिया और भाग गया। हालांकि, जांच में सामने आया कि कमरा अंदर से बंद था और अंदर आने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था। अगर उम्मेदा कातिल होता तो वह बंद कमरे से बाहर कैसे निकलता? कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा पुलिस को हत्या में इस्तेमाल किया गया 12 इंच का चाकू भी बरामद हुआ, जिसे एक बाजरे के ड्रम में छिपाकर रखा गया था। इससे ये साफ हो गया कि लतीफ ने पहले शरीफन की गला दबाकर और फिर चाकू से गला रेतकर हत्या की। इसके बाद खुद को बचाने और मामले को दूसरा मोड़ देने के लिए उसने ही उम्मेदा का नाम लिखा और अपनी गर्दन पर भी चाकू से वार किया। 7 अगस्त 2024 को, मेड़ता की विशिष्ट अदालत ने सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर अब्दुल लतीफ को शरीफन की हत्या का दोषी पाया। उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। घर में महिला की लाश, फर्श पर बिखरा था खून:लहूलुहान हालत में तड़पता मिला युवक, कागज पर लिखा था हत्यारे का नाम; पार्ट-1