ग्रामीण इलाकों में बगैर पट्टे के रहने वालों और कमजोर वर्ग के परिवारों को ग्राम पंचायतों द्वारा रियायती दरों पर और कुछ मामलों में बिल्कुल मुफ्त पट्टे जारी का प्रावधान लागू रहेगा। पंचायती राज विभाग ने इस मामले में नियम कायदों की स्पष्ट गाइडलाइन ग्रामीणों के लिए जारी की है। इसमें बताया गया है कि पुराने मकानों का पट्टा (नियमन) केस में यदि कोई व्यक्ति आबादी भूमि पर पुराना मकान बनाकर रह रहा है और पट्टा लेना चाहता है, तो उसे प्रारूप 23-क में आवेदन करना होगा। इसमें 300 वर्ग गज तक के क्षेत्रफल के लिए फीस की दरें 50 वर्ष से अधिक पुराने मकान पर 100 रुपए है। वहीं 70 वर्ष के दौरान बने मकान (31 दिसंबर 2016 से पहले) के लिए 200 रुपए की फीस है। यदि जमीन तय क्षेत्रफल से ज्यादा है, तो अतिरिक्त हिस्से पर डीएलसी (जिला स्तरीय समिति) द्वारा निर्धारित बाजार दर का 25% चार्ज लिया जाएगा। आबादी के हिसाब से दरें तय 1000 से कम आबादी वाले गांव- 2 रुपए प्रति वर्ग मीटर। 1001 से 2000 की आबादी वाले गांव: 5 रुपए प्रति वर्ग मीटर। (1991 की जनगणना के अनुसार) 2000 से अधिक आबादी वाले गांव- 10 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से पट्टा मिलेगा। विशेष मुफ्त श्रेणियां- बीपीएल परिवार और घुमंतू भेड़ पालकों को ग्राम पंचायत की भूमि बिल्कुल मुफ्त आवंटित की जाएगी। सिंचाई परियोजना के विस्थापित- इन्हें इनके पुराने मालिकाना हक वाले मकान के समतुल्य (अधिकतम 3000 वर्ग गज) भूमि फ्री मिलेगी। महिलाओं के लिए 30% आरक्षण- इस नियम के तहत आवंटित होने वाली भूमि का 30 प्रतिशत हिस्सा विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा। बीपीएल परिवारों को छूट- 50 वर्ष से पुराने मकानों के लिए बीपीएल परिवारों से कोई फीस नहीं ली जाएगी। 31 दिसंबर 2016 से पहले के मकानों के लिए उन्हें केवल 10% फीस ही देनी होगी। झुग्गी-झोपड़ी या कच्चा मकान (वर्ष 2003 तक)- ऐसे परिवार जिनके पास कहीं भी मकान नहीं है और 2003 से आबादी भूमि पर कच्चा मकान या झुग्गी है, उन्हें 300 वर्ग गज तक मुफ्त नियमन का अधिकार है। इसका पट्टा प्रारूप 23-ख में परिवार की महिला मुखिया के नाम जारी होगा। पिछड़े और जरूरतमंद वर्गों को प्रारूप 23-ग में 300 वर्ग गज तक की आबादी भूमि रियायती दरों पर आवंटित कर सकती हैं। बेचान नहीं होगा- इन पट्टों को बेचा नहीं जा सकेगा। नियम 158/3 के तहत आवंटित की गई भूमि अहस्तांतरणीय होगी। इन पट्टों पर बड़े अक्षरों में ‘विक्रय के लिए नहीं’ की मुहर लगाई जाएगी। यदि कोई भी लाभार्थी इस जमीन या मकान को किसी अन्य व्यक्ति को बेचता या ट्रांसफर करता है, तो आवंटन अपने आप रद्द हो जाएगा।