चित्तौड़गढ़ जिले के एक बुजुर्ग से इन्वेस्टमेंट के नाम लाखों रुपए की ठगी कर ली। यूट्यूब पर आईपीओ का एड देख झांसे में आए निम्बाहेड़ा के प्रदीप कुमार नवलखा (50) ने 19.89 लाख रुपए का इन्वेस्टमें किया। इतना ही नहीं प्रदीप को झांसे में लेने के लिए उन्हें एक वॉट्सएप ग्रुप में जोड़ा। जहां झूठे मुनाफे के फर्जी विज्ञापन शेयर किए जाते थे। ऐसे में वे झांसे में आने लगे। इसके बाद जब लाखों रुपए का इन्वेस्टमेंट कर रुपए निकालने की कोशिश की तो पता चला कि जिस एप के जरिए वे इन्वेस्टमेंट करवा रहे थे, वह फर्जी थी। पीड़ित ने तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। यूट्यूब एड से शुरू हुई ठगी की कहानी, वॉट्सएप के जरिए बनाया भरोसा पीड़ित ने बताया कि जनवरी 2026 में वह मोबाइल पर यूट्यूब देख रहे थे, तभी उन्हें एक IPO निवेश से जुड़ा विज्ञापन दिखाई दिया। इस विज्ञापन में एक बड़ी कंपनी का नाम इस्तेमाल किया गया था, जिससे भरोसा बढ़ा। जब उन्होंने उस एड पर क्लिक किया तो वह सीधे व्हाट्सएप चैट पर पहुंच गए। वहां एक व्यक्ति ने खुद को कंपनी का कर्मचारी बताया और कहा कि अगर वे निवेश करते हैं तो 30 प्रतिशत से ज्यादा मुनाफा मिल सकता है। शुरुआत में पीड़ित को यह ऑफर अच्छा लगा और उन्होंने बातचीत जारी रखी। ठग ने उन्हें पूरी प्रक्रिया समझाते हुए एक लिंक भेजा, जिससे एक एप्लीकेशन डाउनलोड करवाई गई और उसी पर उनका नया अकाउंट बनवाया गया। शुरुआत में छोटा निवेश, फिर बढ़ता गया भरोसा और रकम ठग ने पीड़ित को पहले केवल 2 हजार रुपए निवेश करने के लिए कहा। इसके लिए एक बैंक खाता दिया गया, जो किसी अन्य फर्म के नाम पर था। जब पीड़ित ने इस पर सवाल उठाया तो ठग ने समझाया कि यह ब्रोकरेज अकाउंट है और बाद में पैसा कंपनी तक पहुंच जाता है। इस बात पर भरोसा करते हुए पीड़ित ने 2 फरवरी को 2 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद एप्लीकेशन में उनका बैलेंस दिखने लगा, जिससे उनका भरोसा और बढ़ गया। फिर उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ लिया गया, जहां और भी लोगों के मुनाफे के मैसेज दिखाए जाते थे, जिससे उन्हें लगा कि यह सब असली है। बड़ी रकम निवेश करवाई, IPO में मुनाफा दिखाकर फंसाया इसके बाद ठगों ने पीड़ित को समझाया कि 2 हजार से कुछ नहीं होगा और बड़ी रकम निवेश करनी होगी। इस पर उन्होंने 3 फरवरी को 1 लाख 95 हजार रुपए और डाल दिए। एप्लीकेशन में बैलेंस बढ़ता दिखाया गया और उन्हें एक कंपनी के IPO में निवेश करने को कहा गया। उन्होंने 1 लाख 92 हजार रुपए IPO में लगाए, जिसके बाद एप में उन्हें शेयर अलॉटमेंट दिखाया गया और 1600 शेयर दिखाई देने लगे। कुछ दिन बाद ठगों ने ही उन्हें ये शेयर बेचने को कहा और ऐप में मुनाफा दिखाकर बैलेंस 3 लाख रुपए से ज्यादा दिखा दिया गया। यही वह मोड़ था, जहां पीड़ित पूरी तरह ठगों के झांसे में आ गया। लालच में आकर बार-बार निवेश, कुल 19.89 लाख रुपए का नुकसान इसके बाद ठगों ने लगातार नई-नई कंपनियों के IPO का लालच दिया और पीड़ित से बार-बार पैसे निवेश करवाए। पीड़ित ने 1 लाख, 3 लाख, 3.30 लाख और 10.62 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। इस तरह कुल मिलाकर 19 लाख 89 हजार रुपए ठगों के पास चले गए। हर बार एप्लीकेशन में बैलेंस और मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाया जाता रहा, जिससे पीड़ित को लगता रहा कि उसका पैसा सुरक्षित है और बढ़ रहा है। लेकिन असल में यह पूरा सिस्टम फर्जी था और सिर्फ दिखावे के लिए बनाया गया था। पैसे निकालने की कोशिश में खुला पूरा राज, नंबर हुए बंद जब पीड़ित ने अपने पैसे निकालने की कोशिश की तो उसे कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद एप्लीकेशन खोलने पर “सस्पेक्ट फिशिंग” की चेतावनी आने लगी और बैलेंस भी शून्य दिखाने लगा। जब उन्होंने वॉट्सएप नंबर और ग्रुप एडमिन से संपर्क करने की कोशिश की तो सभी नंबर बंद मिले। इसके बाद उन्होंने संबंधित कंपनी से संपर्क किया, जहां से साफ जवाब मिला कि उनके यहां ऐसा कोई कर्मचारी काम ही नहीं करता। तब जाकर पीड़ित को समझ में आया कि उसके साथ धोखाधड़ी हो चुकी है। ठगी का पता चलने पर साइबर क्राइम पोर्टल 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के आधार पर जयपुर एटीएस-एसओजी ने जीरो एफआईआर दर्ज कर मामला चित्तौड़गढ़ साइबर थाने भेज दिया, जहां अब केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। इस मामले की जांच इंस्पेक्टर मधु कंवर को सौंपी गई है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठगी के पीछे कौन लोग शामिल हैं और पैसे किन खातों में गए।