महिला सुरक्षा के उद्देश्य से पंचायती राज मंत्रालय ने निर्भय चेतना कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए सशक्त बनाया जाएगा। साथ ही गांवों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इस पहल के तहत पुरुष जनप्रतिनिधियों को भी महिला संबंधी मुद्दों के प्रति संवदेनशील रहने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अंतर्गत तीन चरण प्रस्तावित किए गए हैं। शुरुआती चरण में पुरुष जनप्रतिनिधियों को महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। उन्हें विशेषज्ञ प्रशिक्षित भी करेंगे। इसी तरह दूसरे चरण में महिला पंच–सरपंचों और जनप्रतिनिधियों का सशक्तीकरण किया जाएगा। आखिरी और तीसरे चरण में गांवों के सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया जाएगा। इस अभियान के तहत देश भर की सभी पंचायतों को शामिल किया जाएगा। इसमें पंचायती राज संस्थाओं के 17.5 लाख से ज्यादा पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को समानता, महिला अधिकार और उनके लिए सुरक्षित माहौल तैयार करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर तीस हजार मास्टर ट्रेनर्स चयनित किए जाएंगे, जो जमीनी स्तर पर इन जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करेंगे। ताकि पुरुष नेता महिला सुरक्षा के प्रति संवेदनशील होंगे तो उनकी सक्रिय भागीदारी से एक ऐसा माहौल बनेगा जिससे ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ने के अनुकूल अवसर मिलेंगे। इसी अभियान में 14.5 लाख से अधिक महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों को कानून संबंधी का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। ताकि वे अधिकारों के प्रति जागरूक हों और कानूनी पहलुओं के बारे में जानकारी रखें। पुरुष और महिला जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने के बाद गांवों के वातावरण को सुरक्षित बनाने के लिए गांवों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने का काम शुरू किया जाएगा। इसका खर्च निर्भया कोष से वहन किया जाएगा। यह ग्रामीण स्तर पर महिलाओं के लिए सुरक्षा की तीसरी आंख बनेगी। महिलाओं को सुरक्षित वातावरण देने की इस पहल के तहत पंचायतों में ही आपसी प्रतिस्पर्धा रखी जाएगी। इसके अंतर्गत बेहतर प्रदर्शन करने वाली ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। प्रदेश में महिलाओं के विरुद्ध अपराध 0.54% बढ़े राजस्थान में मई 2025 से 2026 तक महिलाओं के खिलाफ अपराध के करीब 16 हजार मामले दर्ज हुए हैं। वर्ष 2025 की तुलना में इस वर्ष 0.54% बढ़ोतरी हुई है। इस वर्ष मई महीने में ही महिला अपराध के साढ़े तीन हजार से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। एक साल में दर्ज मुकदमों में सर्वाधिक 5566 मामले घरेलू उत्पीड़न और 4117 मामले छेड़ छाड़ के हैं। दुष्कर्म के 2100 से भी ज्यादा मामले सामने आए। दहेज प्रताड़ना को लेकर डेढ़ सौ के करीब ऐसे केस हैं, जिनमें महिलाओं की जान चली गई।