राजस्थान में फार्मेसी शिक्षा और पंजीकरण व्यवस्था में बड़ा घोटाला सामने आया है। राजस्थान फार्मेसी काउंसिल ने 133 से अधिक अभ्यर्थियों का पंजीकरण ऐसे दस्तावेजों के आधार पर कर दिया, जिन्हें संबंधित यूनिवर्सिटी ने ही मान्यता नहीं दी। अभ्यर्थियों ने ओपीजेएस यूनिवर्सिटी, सादुलपुर (चूरू) के नाम से डिग्रियां और मार्कशीट पेश कीं, जबकि यूनिवर्सिटी का दावा है कि इन वर्षों में ऐसे कोई एडमिशन या परीक्षा ही नहीं हुई। मामले में काउंसिल के रजिस्ट्रार नरेन्द्र रैगर और अन्य चार कर्मियों के खिलाफ चूरू के हमीरवास थाने में FIR दर्ज की गई है। सरकार ने रैगर को पद से हटाकर उनकी सभी शक्तियां सीज कर दी हैं। नियमों के विपरीत... यूनिवर्सिटी के नाम पर 130 से ज्यादा अभ्यर्थियों ने 7 महीने में पंजीकरण के लिए आवेदन किया और सभी का रजिस्ट्रेशन कर दिया गया। जबकि जून 2024 में एज्युकेशन विभाग के ग्रुप-4 ने राज्यपाल, प्रमुख सचिव और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बताया था कि ओपीजेएस से जुड़े कई अभ्यर्थियों की डिग्रियां संदिग्ध हैं। इसके बाद 2013 की धारा 44 (उपधारा 2 व 3) के तहत जांच कमेटी गठित हुई और राज्य सरकार ने यूनिवर्सिटी के नए एडमिशन पर रोक लगा दी। इसमें फार्मेसी कोर्स भी शामिल था। यानी 2024-25 में फार्मेसी के कोई बैच या परीक्षा नहीं हुई। भास्कर इनसाइट : वेरिफिकेशन ही फर्जी “मामला सामने आते ही बैठक बुलाई गई। रजिस्ट्रार नरेन्द्र रैगर को हटा दिया गया है और आगे जांच कराई जा रही है। छुट्टियां होने की वजह से जांच में थोड़ी देरी हुई।” - महावीर सौगानी, अध्यक्ष, आरएमसी