जिले में पिछले 10 से 12 दिनों से मानसून की रफ्तार थमने से खरीफ की फसलों पर संकट गहराने लगा है। शुरुआती अच्छी बारिश के बाद किसानों ने बड़े पैमाने पर मक्का, सोयाबीन और अन्य फसलों की बुआई कर दी थी, लेकिन अब लगातार बारिश नहीं होने से खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है। कई जगह मक्का और सोयाबीन के पौधे पीले पड़ने लगे हैं, जबकि खेतों में दरारें भी दिखाई देने लगी हैं। इससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। बारिश नहीं होने से जिन किसानों के पास कुएं, नलकूप और अन्य सिंचाई संसाधन उपलब्ध हैं, वे डीजल इंजन और बिजली पंपों के जरिए फसल बचाने में जुटे हैं। दूर-दराज के जलस्रोतों से सिंचाई करने के कारण डीजल, बिजली और मजदूरी का खर्च बढ़ गया है। इससे खेती की लागत में लगातार इजाफा हो रहा है और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। बारिश नहीं होने से फसल सूखने लगी । विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश का दौर जल्द शुरू नहीं हुआ तो भूजल स्तर पर भी असर पड़ सकता है और सिंचाई करना कठिन हो जाएगा। राज्यावास निवासी किसान पुष्कर पुर्बिया ने बताया कि समय पर बारिश नहीं होने से मक्का की फसल प्रभावित हो रही है। किसानों की उम्मीद अब अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश पर टिकी है, ताकि महीनों की मेहनत और निवेश बचाया जा सके। जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन नहीं हैं, उनकी उम्मीद पूरी तरह मानसून पर टिकी है। किसानों का कहना है कि यदि अगले दो से चार दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल सूख सकती है और दोबारा बुआई की नौबत आ सकती है। इससे बीज, खाद और मजदूरी पर फिर से खर्च करना पड़ेगा, जिससे आर्थिक नुकसान और बढ़ जाएगा। राजसमंद. बुवाई के बाद पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में खड़ी फसलों पर संकट मंडरा रहा है। पानी के अभाव में करीब 20 प्रतिशत फसल सूखने लगी है। राज्यावास क्षेत्र के अब किसान कुओं के पानी से फव्वारा और पाइपलाइन के जरिए सिंचाई कर मक्का फसल को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। आसमान की ओर टकटकी लगाए किसान बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं।