एक विचार अगर समाज के हित से जुड़ा हो तो वह धीरे-धीरे अभियान बन जाता है और फिर सैकड़ों जिंदगी बदल देता है। ऐसा ही एक प्रेरक प्रयास है “शिक्षा मित्र अभियान”, जिसकी शुरुआत समाजसेवी गिरधारी लाल गुप्ता की प्रेरणा से हुई। उनका मानना था कि कई प्रतिभाशाली बच्चे केवल आर्थिक अभाव के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं, जबकि उनमें आगे बढ़ने की पूरी क्षमता होती है। ऐसे बच्चों का हाथ थामना समाज की जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ करीब सात वर्ष पहले अभियान की शुरुआत हुई। शुरुआत में गिरधारी लाल गुप्ता ने स्वयं सहयोग करते हुए पांच जरूरतमंद बच्चों की स्कूल फीस जमा कराई। इनमें अग्रसेन विद्या पीठ, आदर्श विद्या मंदिर, कला विद्या मंदिर, सरकारी विद्यालय और रेलवे स्कूल के विद्यार्थी शामिल थे। छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह प्रयास आज एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है। अभियान से जुड़ी कहानियां इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि हैं। जिन बच्चों की कभी फीस जमा कराने के लिए मदद की गई थी, उनमें से कई आज उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। शिवानी सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रही हैं। वहीं अंकित एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है और डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस अभियान के सहयोग से चार छात्राएं पीएचडी कर रही हैं। दस से ज्यादा स्टूडेंट पेशेवर पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर रहे हैं। कई छात्र-छात्राएं हैं जो आर्थिक सहायता मिलने के बाद अपने सपनों को साकार करने की राह पर हैं। अब तक शिक्षा मित्र अभियान के माध्यम से 353 से अधिक विद्यार्थियों की स्कूल फीस जमा कराई जा चुकी है। अभियान से जुड़ने वाले लोगों का मानना है कि किसी बच्चे की फीस भरना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उसके भविष्य में निवेश है। अब इस अभियान को आगे बढ़ाने में भूपेंद्र सिंह मीना, शिखा रामूका, दीनदयाल गोयल और हेमलता सिंह संयोजक की भूमिका निभा रहे हैं। इनके साथ समाज के 100 से अधिक लोग जुड़े हुए हैं, जो नियमित रूप से जरूरतमंद बच्चों की मदद करते हैं। यह सहयोग केवल फीस तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को ड्रेस, कॉपी, पेंसिल और अन्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है।