उड़ीसा में बहन की लाश को कब्र से निकालकर बैंक में सबूत के तौर लेकर ले जाने वाले आदिवासी जीतू मुंडा के परिवार की कृषि मंत्री डॉ किरोड़ीलाल मीणा ने मदद करने की घोषणा की है। डॉ. किरोड़ी ने जीतू मुंडा के साथ हुई घटना पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे सभ्य समाज के माथे पर कलंक बताया। उन्होंने उड़ीसा सीएम मोहनचरण माझी से इस पर कार्रवाई की मांग की है। किरोड़ी ने जीतू मुंडा के परिवाार को खुद की एक महीने की सैलरी का पैसा देने की भी घोषणा की है। कृषि मंत्री डॉ ​किरोड़ी ने एक्स पर लिखा- जीतू मुंडा की बेबसी और पीड़ा देखकर कलेजा कांप उठा। एक गरीब आदिवासी के साथ कागजी खानापूर्ति के नाम इस तरह की प्रताड़ना किसी भी सभ्य समाज के माथे पर कलंक है। मेरा ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहनचरण माझी से पुरजोर आग्रह है कि इस मामले में तत्काल और कठोरतम कार्रवाई की जाए। जीतू मुंडा का दर्द मेरा दर्द है, उनकी पीड़ा मेरी पीड़ा है। मेरा कर्तव्य है कि संकट की इस घड़ी में मैं उनके साथ खड़ा रहूं। मैं अपना एक माह का वेतन उनके परिवार को समर्पित करूंगा। शीघ्र ही उन तक राशि पहुंच जाएगी। यह हम सबका दायित्व है कि भविष्य में वे स्वयं को असहाय न समझें। बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचे थे आदिवासी जीतू मुंडा ओडिशा के क्योंझर में सोमवार को आदिवासी जीतू मुंडा अपनी मरी हुई बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंच गया था। जीतू मुंडा अपनी बहन कलारा मुंडा के खाते से 20 हजार रुपए निकालना चाहता था, लेकिन बैंक कर्मचारियों ने खाताधारक को लाने की शर्त रखी। जीतू बैंक में पहले ही बहन की मौत की जानकारी दे चुका था लेकिन उसे बैंक के नियम कायदों की जानकारी नहीं थी। उसे कोई मदद नहीं मिली तो परेशान होकर उसने कब्र से कंकाल निकालकर बैंक में पेश कर दिया। बहन का कंकाल कंधे पर लेकर जीतू करीब तीन किलोमीटर पैदल चला था। प्रशासन के दखल के बाद शव फिर से दफनाया था दरअसल, उड़ीसा के क्योंझर जिले के मल्लिपसी में बने ओडिशा ग्रामीण बैंक की ब्रांच में जीतू की बहन का खाता था। जीतू जब लाश लेकर पहुंचा तो बैंक कर्मचारियों ने पुलिस बुलाई। पुलिस प्रशासन ने समझाइश कर जीतू को मदद का भरोसा दिलाया और कंकाल को फिर से दफनाया। जीतू अनपढ़ होने के कारण नियम नहीं जानता था। जीतू मुंडा की बड़ी बहन कालरा मुंडा की 26 जनवरी 2026 को मौत हो गई थी। कालरा मुंडा के बैंक खाते में उसके पति और बेटे को नॉमिनी बना रखा था और दोनों की मौत हो चुकी है। अब जीतू ही निकट रिश्तेदार के नाते उस पैसे का दावेदार था।