चूरू | जिला मुख्यालय पर संचालित जिला मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के जरिए एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक खेतों की मिट्‌टी के 20705 सैंपलों की जांच की गई। इनकी जांच के आधार पर 20705 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाकर दिए गए। जिले में 21680 सैंपलों की जांच का लक्ष्य मिला था। प्रयोगशाला प्रभारी कविता बुडानिया ने बताया कि सैंपलों की जांच के बाद संबंधित 20705 खेतों की मिट्‌टी में से 95.23% में जिंक की कमी पाई गई। ऑर्गेनिक कार्बन की 94.82% व फॉस्फोरस की 63% कमी पाई। सर्वाधिक 5242 सैंपल राजगढ़ क्षेत्र से लिए गए। इनके अलावा पानी के भी 604 सैंपल लेकर जांच की गई। प्रयोगशाला प्रभारी बुडानिया ने बताया कि किसानों को मृदा जांच अनुसार फसलों में मुख्य व सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित मात्रा में उपयोग करना चाहिए। कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने के लिए जैविक सामग्री जैसे गोबर की खाद, कंपोस्ट आदि का उपयोग करना चाहिए। फास्फोरस की पूर्ति के लिए डीएपी, एएसपी का उपयोग करना चाहिए। जिंक के लिए जिंक सल्फेट का उपयोग सही रहता है। केवल डीएपी पर निर्भर रहने के बजाय, मिट्टी की जांच के आधार पर सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी), एनपीके जैसे उर्वरकों का संतुलित मात्रा में उपयोग करें । वहीं गोबर की खाद का ज्यादा उपयोग करें।