वन विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि जालोर जिले की 70 साइट्स पर लगाए गए 7 लाख पौधों में सिर्फ हजार पौधे भी जीवित नहीं हैं। इसके बाद भी हर साल उनकी सर्वाइवल रिपोर्ट तैयार हो रही है। अधिकारी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। जीपीएस के फोटो भी अपलोड किए जा रहे हैं। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर पांच साल तक मेंटेनेंस के करीब 2.80 करोड़ रुपए उठाए जा चुके हैं। पौधों की देखभाल के लिए कागजों में चौकीदार भी तैनात हैं। भास्कर चार दुर्गम साइट चितहरणी, ऐसाराणा, जागनाथजी और रणछोड़नगर पर पहुंचा। करीब 200 हेक्टेयर क्षेत्र में 40 हजार पौधे होने चाहिए थे, लेकिन सिर्फ करीब 150 पौधे मिले। बाकी जगह कहीं सिर्फ खाई फेंसिंग बची थी, कहींतो कहीं वर्षों पुराने प्राकृतिक बबूल, बेर और जाल के पेड़ ही दिखाई दिए। हर साल मेंटेनेंस का बजट निकल रहा था, उसका अधिकांश हिस्सा धरातल से गायब था। शेष | पेज 4 इन सभी साइटों का बजट प्रतिवर्ष 4 से 5 लाख रुपए के बीच में है। जबकि पौधरोपण के लिए एडवांस वर्क के नाम पर हर साइट के लिए 25 लाख रुपए मिलते हैं। हैरानी है कि जीपीएस लोकेशन के आधार पर दो से चार पौधों की फोटो डाल दी जाती है। इसी के आधार पर प्लांटेशन जनरल (रिपोर्ट) बनाई जाती है, जिसमें एडवांस वर्क से लेकर 5 साल तक की रिपोर्ट तैयार होती है। पूरे जिले में सिर्फ 2 ही साइट की जांच वन विभाग ने भी की थी। चितहरणी में 14 और रानीवाड़ा के पाल भील भाखरी में 32% पौधे जीवित मिले थे। जबकि जिले में 70 साइट हैं। 40 लाख रुपए मिलते हैं
5 साल तक रख-रखाव करने के लिए कैंपा, आरडीएफ, एसडीएस समेत विभिन्न योजनाओं से बजट मिलता है। विभाग पहले 50 हेक्टेयर की साइट चिह्नित करता है और उस पर 10 हजार पौधे लगाए जाते हैं। पहले साल एडवांस वर्क के लिए करीब 25 लाख रुपए मिलते हैं। उसके बाद प्रतिवर्ष 4 साल तक मेंटेनेंस के लिए रुपए मिलते हैं। कुल मिलाकर एक साइट पर करीब 40 लाख रुपए खर्च होता है। एडवांस में 25 लाख रुपए
समिति को एडवांस वर्क के लिए 25 लाख रुपए मिलते हैं। समिति का अध्यक्ष वन विभाग पास के गांव का एक व्यक्ति होता है। सचिव वनपाल या वनरक्षक को बनाया जाता है। किसी एक निरक्षर को लेबर इंचार्ज बनाया जाता है। जहां 10 हजार पौधे लगाने होते हैं, वहां शुरुआत में ज्यादा से ज्यादा 1 हजार पौधे लगाकर काम को पूरा बता दिया जाता है। यहां भी यही हालात रेवत में 2023-24 में साइट चिह्नित है, सितंबर 2025 में 8 हजार पौधों के मेंटनेंस के लिए 1,79,525 रुपए मिले। जून 2026 में 61,075 रुपए मिले, लेकिन मौके पर मेंटनेंस कुछ नहीं और मौके पर 40 पौधे। इसी तरह नारणावास में एसडीएस के तहत 2022-23 चिह्नित साइट पर सितंबर 2025 में 3,55,500 रुपए और जून 2026 में 1,75,250 रुपए मेंटेनेंस के नाम पर मिले। यहां भी किसी तरह का कोई काम नहीं हुआ। चितहरणी - जून 2026 में 3.55 लाख का मेंटेनेंस, मौके पर एक भी पौधा नहीं यह साइट एसडीएस योजना के तहत 2022-23 में विकसित हुई थी। जून 2026 में मेंटेनेंस के लिए 3.55 लाख रुपए जारी हुए। मौके पर एक भी पौधा नहीं मिला। सिर्फ पुरानी खाई फेंसिंग, टूटे हुए सीमेंट के कुंड और प्राकृतिक बबूल-जाल के पेड़ मिले। ऐसाराणा - 10 हजार पौधों की साइट, मिले सिर्फ 45 आरडीएफ-1 के तहत विकसित इस साइट पर 10 हजार पौधे लगाए जाने थे। अगस्त-25 में मेंटेनेंस राशि 1.11 लाख जारी हुई। पूरी साइट पर 45 पौधे मिले। बाकी क्षेत्र में केवल खाई फेंसिंग दिखाई दी। यहां चौकीदार नहीं था। “मैं कहीं बाहर आया हुआ हूं, मुझे इनके बारे में जानकारी नहीं है। जानकारी चाहिए तो रैंजर से बात कर लो।”
-जयदेवसिंह चारण, डीएफओ, जालोर