राजस्थान की पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम (PCPNDT) टीम ने भ्रूण लिंग परीक्षण गिरोह के शातिर दलाल को हरियाणा के डबवाली से गिरफ्तार किया है। आरोपी राकेश कुमार लंबे समय से राजस्थान और हरियाणा के सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण के नेटवर्क का संचालन कर रहा था। आरोपी पहले भी साल 2019 में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत गिरफ्तार हो चुका है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया- पीसीपीएनडीटी टीम पिछले छह महीनों से आरोपी राकेश कुमार की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख रही थी। पुख्ता खुफिया सूचना मिलने के बाद टीम ने एक सुनियोजित रणनीति तैयार की और डिकॉय ऑपरेशन की योजना बनाई। आरोपी योजना के तहत एक गर्भवती महिला को डिकॉय ग्राहक (फर्जी मरीज) बनाकर आरोपी दलाल राकेश से संपर्क कराया गया। आरोपी ने भ्रूण लिंग परीक्षण कराने के एवज में 36,500 रुपए की मांग की। सौदा तय होने के बाद आरोपी महिला को जांच करवाने के लिए हरियाणा के डबवाली स्थित एक निजी अस्पताल लेकर गया, जहां पहले से तैयार बैठी राजस्थान की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। रंगे हाथों गिरफ्तारी और अस्पताल की भूमिका की जांच डॉ. जोगाराम ने बताया- अस्पताल में सोनोग्राफी और अन्य जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जैसे ही आरोपी ने कथित रूप से भ्रूण का लिंग बताकर महिला को बाहर भेजा, पहले से घात लगाए बैठी पीसीपीएनडीटी टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। कार्रवाई के दौरान टीम ने अस्पताल से सोनोग्राफी रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य भी जब्त किए हैं। अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे नेटवर्क में अस्पताल प्रबंधन की भूमिका और इससे जुड़े अन्य लोगों की गहनता से जांच कर रहे हैं। बेटी होने की झूठी सूचना देकर कराते थे गर्भपात प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह गिरोह कई मामलों में लोगों को झूठी जानकारी देकर गुमराह करता था। आरोपी कथित रूप से गर्भ में बेटी होने की गलत सूचना देकर लोगों को गर्भपात के लिए उकसाता था और इस अवैध धंधे से मोटी रकम वसूलता था। एनएचएम निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया- आरोपी हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और बीकानेर सहित राजस्थान के सीमावर्ती जिलों से गर्भवती महिलाओं को फुसलाकर हरियाणा ले जाता था और वहां अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण करवाता था। 2019 में भी पकड़ा गया था आरोपी आरोपी राकेश कुमार साल 2019 में भी पीसीपीएनडीटी टीम के हत्थे चढ़ चुका था। उस समय संगरिया में उसका अल्ट्रासाउंड सेंटर सीज किया गया था। कुछ साल शांत रहने के बाद वह पिछले दो-तीन सालों से फिर से इस अवैध कारोबार में सक्रिय हो गया था, जिसे इस बार टीम ने दोबारा दबोच लिया। डिकॉय ऑपरेशन का नेतृत्व बीकानेर के संयुक्त निदेशक डॉ. देवेंद्र चौधरी ने किया, जिसमें पीबीआई थाना पुलिस और पीसीपीएनडीटी समन्वयकों की टीम शामिल रही।