माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने राज्य के पीएमश्री विद्यालयों में शिक्षकों और कार्मिकों की प्रतिनियुक्ति के लिए विज्ञप्ति जारी कर दी है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत प्रदेशभर में करीब 4332 से पदों को भरा जाएगा। झुंझुनूं जिले के भी 21 पीएमश्री विद्यालयों में रिक्त पदों पर अनुभवी शिक्षकों को पदस्थापन का मौका मिलेगा। केवल 48 घंटे की विंडो:आवेदन की प्रक्रिया 29 अप्रैल से शुरू होकर 30 अप्रैल 2026 की मध्यरात्रि 12:00 बजे तक ही चलेगी। इच्छुक शिक्षक शाला दर्पण पोर्टल के स्टाफ लॉगिन के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। चयन के लिए '60% अंक' और 'अनुभव' की कड़ी शर्तें अभ्यर्थी के लिए 10वीं, 12वीं, स्नातक और प्रशिक्षण डिग्री में न्यूनतम 60% अंक होना अनिवार्य है। प्राचार्य, व्याख्याता और अध्यापकों के लिए संबंधित पद पर 5 साल का अनुभव जरूरी है। विगत 5 वर्षों का लगातार शत-प्रतिशत वार्षिक परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षक ही पात्र होंगे। किस पद के लिए कितने रिक्त पद 1. प्राचार्य – 99 2. उप प्राचार्य – 267 3. प्राध्यापक (विभिन्न विषय) – 1788 4. वरिष्ठ अध्यापक (विभिन्न विषय) – 1053 5. वरिष्ठ शारीरिक शिक्षा अध्यापक – 67 6. शारीरिक शिक्षा अध्यापक – 23 7. अध्यापक लेवल-2 (विभिन्न विषय) – 255 8. अध्यापक लेवल-1 – 243 9. पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड-II – 75 10. पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड-III – 72 11. वरिष्ठ कंप्यूटर अनुदेशक – 139 12. बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक – 155 13. वरिष्ठ प्रयोगशाला सहायक – 48 14. प्रयोगशाला सहायक – 48 कुल पदों का योग: 4332 ये शिक्षक नहीं हो सकेंगे शामिल जो शिक्षक पहले से अंग्रेजी माध्यम स्कूलों (MGGS) या कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में कार्यरत हैं, वे इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे। चयन के बाद कार्मिकों का पदस्थापन प्रारंभिक रूप से 3 साल के लिए किया जाएगा। चयन परीक्षा का आयोजन की मांग शिक्षक संगठनों की ओर से प्राथमिक अध्यापक संघ (लेवल-प्रथम) का कहना है कि साक्षात्कार की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव हो सकता है। अतः निष्पक्ष चयन सुनिश्चित करने के लिए विभागीय चयन परीक्षा का आयोजन किया जाना चाहिए ताकि योग्यता के आधार पर सही प्रतिभा का चयन हो सके। स्टेट चेयरमैन, प्राथमिक अध्यापक संघ (लेवल-प्रथम) खेमराज मीणा ने कहा कि हम पीएमश्री स्कूलों में सेवाएं देने के लिए तैयार हैं, लेकिन चयन प्रक्रिया पारदर्शी और न्यायपूर्ण होनी चाहिए। पुरानी डिग्रियों के अंक किसी शिक्षक के वर्तमान कौशल का पैमाना नहीं हो सकते। सरकार को विभागीय परीक्षा के जरिए चयन करना चाहिए।