डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों के बाद अब ‘इम्पर्सनेशन’ यानी अधिकारी बनकर ठगी का नया मामला सामने आया है। जयपुर में साइबर ठगों ने एक माइनिंग कंपनी के अकाउंटेंट को चेयरमैन बनकर मैसेज भेजे और कुछ ही घंटों में 5 करोड़ 30 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए। मामले की रिपोर्ट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ठगों ने व्हाट्सएप पर चेयरमैन की फोटो लगाकर भरोसा बनाया और बातचीत के जरिए अकाउंटेंट को निर्देश देते रहे। 4 स्टेप्स में समझें ठगी का तरीका 1. डीपी से बनाया भरोसा ठगों ने चेयरमैन की फोटो व्हाट्सएप डीपी पर लगाकर अकाउंटेंट को मैसेज किया और बैंक बैलेंस की जानकारी मांगी। 2. दो चरण में ट्रांसफर - पहले 1 करोड़ 80 लाख रुपए एक आईसीआईसीआई बैंक खाते में मंगवाए, फिर 3 करोड़ 50 लाख रुपए दूसरे खाते में ट्रांसफर कराए। 3. UTR नंबर मंगवाए - ट्रांजैक्शन के बाद UTR नंबर भी साझा करवाए, ताकि संदेह न हो। 4. तीसरी मांग पर खुलासा - तीसरी बार 90 लाख रुपए और मांगने पर अकाउंटेंट को शक हुआ। असली चेयरमैन से संपर्क करने पर ठगी का पता चला। व्हाट्सएप चैट के मैसेज अपने आप डिलीट हुए पीड़ित के अनुसार, व्हाट्सएप चैट के दौरान कुछ मैसेज अपने आप डिलीट हो रहे थे, जिससे मोबाइल हैकिंग की आशंका जताई गई है। ठगों ने पहले से कंपनी और संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति की जानकारी जुटा रखी थी। सावधानी - पुष्टि के बिना ट्रांसफर न करें राजस्थान स्टेट साइबर क्राइम एवं टेक्निकल सर्विसेज ने सलाह दी है कि किसी नए नंबर से पैसे मांगने पर संबंधित अधिकारी के पुराने नंबर पर कॉल कर पुष्टि करें। केवल फोटो या डीपी देखकर भरोसा न करें। साइबर ठग अक्सर जल्दबाजी और दबाव बनाकर पैसे ट्रांसफर कराने की कोशिश करते हैं। ऐसे में सतर्क रहें और ओटीपी, आधार या बैंक डिटेल किसी के साथ साझा न करें।