अब रेलवे काउंटर से टिकट खरीदने या ऑनलाइन रिजर्वेशन कराने पर यात्रियों की निजी जानकारी और बुकिंग ज्यादा सुरक्षित रहेगी। भारतीय रेलवे की आईटी शाखा क्रिस ने रेल नेटवर्क को हैकर्स और वायरस से बचाने के लिए देश का सबसे बड़ा डिजिटल सुरक्षा अभियान शुरू किया है। प्रोजेक्ट के तहत पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल के सभी 1890 रेलनेट कंप्यूटरों पर अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा एजेंट सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया जा रहा है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि भारतीय रेलवे सुरक्षा संचालन केंद्र आईआरएसओसी के तहत यह राष्ट्रीय पहल पूरे देश में एक साथ लागू हो रही है। कोटा मंडल इसमें पूरी तरह शामिल है। सुरक्षा तंत्र 24x7 सक्रिय रहेगा। कोई अनधिकृत सॉफ्टवेयर या वायरस कंप्यूटर में घुसने की कोशिश करेगा तो सिस्टम तुरंत पहचान करेगा। उसी समय ब्लॉक करेगा। सूचना तत्काल केंद्रीय नियंत्रण कक्ष को जाएगी। जवाबी कार्रवाई का समय शून्य हो जाएगा। रेलवे का संचालन अब डिजिटल हो चुका है। टिकट बुकिंग, माल-भाड़ा प्रबंधन, ट्रेनों का सिग्नलिंग सिस्टम रेलनेट पर निर्भर है। जिससे साइबर हमले का खतरा बना रहता था। नई प्रणाली लागू होने के बाद यात्री टिकट आरक्षण, माल-भाड़ा प्रबंधन, कर्मचारियों के वेतन जैसे संवेदनशील डेटा ज्यादा सुरक्षित रहेंगे। मंडल रेल प्रबंधक अनिल कालरा ने कोटा मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि कार्यालय के कंप्यूटरों पर केवल स्वीकृत और आधिकारिक सॉफ्टवेयर का उपयोग करें। अज्ञात स्रोत से आए लिंक या अटैचमेंट न खोलें। व्हाट्सऐप, ईमेल या किसी अनाधिकृत लिंक से सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने को कहा जाए तो पहले मंडल के आईटी विभाग से सत्यापन कराएं। साइबर हमले के कारण टिकट बुकिंग सिस्टम और रिजर्वेशन चार्टिंग में तकनीकी रुकावट की आशंका कम होगी। ट्रेनों की आवाजाही और पूछताछ प्रणाली एनटीईएस अधिक विश्वसनीय बनेगी। यात्रियों का निजी डेटा और ट्रांजेक्शन विवरण सुरक्षित रहेगा।