आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मानदेय 25 हजार रुपए करने और रिटायरमेंट पर 10 लाख रुपए देने की मांग को लेकर गुरुवार को अलवर में आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले जड़ दिए और सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। वहीं, राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर आशा सहयोगिनियों ने भी मिनी सचिवालय तक रैली निकालकर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान भीषण गर्मी से एक आशा सहयोगिनी बेहोश होकर गिर गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आशा सहयोगिनियां सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं और टीकाकरण अभियान की रीढ़ हैं। आंदोलन के चलते टीकाकरण सहित कई सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी होने तक आंगनबाड़ी केंद्र नहीं खोले जाएंगे, चाहे नोटिस मिले या नौकरी से हटाने की कार्रवाई हो। पुलिस से हुई नोकझोंक बेहोश हुई आशा सहयोगिनी को पुलिस वाहन से अस्पताल ले जाने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी महिलाओं के बीच तीखी बहस हो गई। पुलिस ने महिलाओं को सचिवालय के मेन गेट से दूर प्रदर्शन करने के लिए कहा था। अरावली विहार थाने के इंचार्ज ने आशा सहयोगिनियों से कहा कि मन चाहे जैसे आंदोलन नहीं कर सकती। वहीं एक महिला पुलिसकर्मी ने एक महिला को गले से पकड़कर धक्का भी दिया। काम स्थायी कर्मचारियों जैसा, दाम बेहद कम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रतिनिधि लतेश कुमारी का कहना है कि कार्यकर्ता लंबे समय से बेहद कम मानदेय पर काम कर रही हैं। उनसे विभाग की सभी महत्वपूर्ण योजनाओं का जिम्मा स्थायी कर्मचारियों की तरह संभलवाया जाता है, लेकिन बदले में उचित पारिश्रमिक नहीं मिलता। इससे पहले 5 जून को प्रस्तावित सांकेतिक धरने के दौरान अधिकारियों ने बकाया मानदेय भुगतान और अन्य मांगों को सरकार के सामने रखकर समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन इतने दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस कारण अब ताले जड़कर विरोध में उतरे हैं। तालाबंदी की चेतावनी, सरकार की होगी जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि मांगों का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यदि हड़ताल और तालाबंदी के कारण विभागीय कार्य या आमजन की सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग और राज्य सरकार की होगी।