एलएचवी/एएनएम संघ ऑफ राजस्थान ने प्रदेश में प्रसूता मृत्यु के मामलों को लेकर प्रमुख शासन सचिव की ओर से दिए गए बयानों का विरोध किया है। संघ की प्रदेश अध्यक्ष कमला मीणा के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी घटना के बाद कई सालों से फील्ड में काम कर रही एएनएम को ही दोषी ठहरा दिया जाता है, जबकि ऐसा करना सही नहीं है। संघ ने बिना जांच एएनएम को जिम्मेदार ठहराने की प्रक्रिया बंद करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि अगर बयान वापस नहीं लिए गए और एएनएम को बेवजह जिम्मेदार ठहराया गया तो पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार किया जाएगा। एएनएम के कामों की जानकारी दी जिला अध्यक्ष शकुन्तला कुमारी, महामंत्री हेमलता, संरक्षक सुनीता, कोषाध्यक्ष जनक कुमारी, प्रचार मंत्री सूपा देवासी, सलाहकार मंत्री हेमलता सहित ब्लॉक अध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि एएनएम टीकाकरण, परिवार कल्याण कार्यक्रम, मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया नियंत्रण, अलग-अलग सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार, ऑनलाइन रिपोर्टिंग, पीसीटीएस, यू-विन, लाइन लिस्टिंग, सर्वे और दूसरी स्वास्थ्य सेवाओं का काम करती हैं। प्रसूताओं की गहन जांच एएनएम की जिम्मेदारी नहीं संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि एएनएम प्रयोगशाला तकनीशियन या विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होती। इसलिए प्रसूताओं की गहन चिकित्सकीय जांच की जिम्मेदारी उन पर नहीं डाली जानी चाहिए। उनका कहना है कि एएनएम अपने तय दायित्वों के अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं देती हैं। बिना जांच दोषी ठहराने की परंपरा बंद करने की मांग संघ ने कहा कि एएनएम स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं और निस्वार्थ भाव से अपनी सेवाएं दे रही हैं। इसलिए प्रसूता मृत्यु जैसे मामलों में बिना जांच एएनएम को दोषी ठहराने की परंपरा बंद की जानी चाहिए। आंदोलन और कार्य बहिष्कार की चेतावनी एलएचवी/एएनएम संघ ऑफ राजस्थान ने प्रमुख शासन सचिव के बयानों का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अगर इस तरह के बयान वापस नहीं लिए गए और एएनएम को अनावश्यक रूप से जिम्मेदार ठहराया जाता रहा, तो पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार किया जाएगा। संघ ने कहा कि ऐसी स्थिति में इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।