राजस्थान में ब्रेस्ट कैंसर के रोजाना 41 मरीज आ रहे हैं, यानी साल में औसतन 15 हजार। कुल सालाना 19% तक वृद्धि दर्ज की गई है। 2025 के केसों के मुताबिक राजस्थान ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में देश में पांचवें स्थान पर है। क्यों? जवाब है- महिलाओं की झिझक, सिस्टम की कमजोर स्क्रीनिंग। ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग करने वाली मोबाइल कैंसर वैन में कमियों की जानकारी हमें मिली तो हमने खुद इस व्यवस्था को पेशेंट बनकर देखा-समझा। हमने भांकरोटा स्वास्थ्य केंद्र में ओपीडी की पर्ची बनवाई। हमसे पूछा गया कि जांच क्यों करानी है? फिर एक कमरे में भेजा गया, जहां महिला डॉक्टर थीं। डॉक्टर ने पूछा- उम्र क्या है? हमने 32 और 34 वर्ष बताई। डॉक्टर ने पूछा- जांच कराने की जरूरत क्यों लगी? हमने कहा- डर लगता है, आप हमारा एग्जामिनेशन कीजिए। डॉक्टर ने हमारा क्लीनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन किया, पूछा- दर्द कब होता है, माहवारी से पहले या सामान्य दिनों में? गांठ महसूस होती है या नहीं? जांच के बाद कहा- सब सामान्य है। मैमोग्राफी के लिए डॉक्टर ने मना कर दिया। हम दोनों काउंटर पर लौंटीं, मैमोग्राफी के लिए पूछा। सलाह मिली कि एसएमएस अस्पताल जाकर ब्रेस्ट सोनोग्राफी कराएं, उसमें संदिग्ध संकेत मिलेगा तो वहीं मैमोग्राफी होगी। हमने पूछा- यहां सोनोग्राफी नहीं करते? जवाब मिला- वैन में तो अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है। प्राथमिक जांच की रिपोर्ट मांगी तो कहा- वैन किसी को रिपोर्ट नहीं देती, फॉलोअप नहीं करती। हम जांच व्यवस्था देखने गए थे, मगर सवाल लेकर लौटे- 10 करोड़ रुपए की 8 वैन 1.38 करोड़ स्क्रीनिंग कर चुकी। मशीनें नहीं, रिपोर्ट नहीं, फॉलोअप नहीं... ये कैसी स्क्रीनिंग है? यूपी, गोवा, आंध्र की वैन में अल्ट्रासाउंड, AI स्क्रीनिंग भी, राजस्थान में क्यों नहीं? 1. हमारे पास 8 मोबाइ‌ल वैन हैं, प्रत्येक की कीमत 1.25 करोड़ रुपए है। डॉक्टर, रेडियोग्राफर सहित 9 लोगों का स्टाफ है, अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं, रिपोर्ट नहीं दी जाती है। 2. वैन में जांच कराने जाते ही स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, एसएमएस या जिला अस्पताल जाने को कहा जाता है। 3. वैन में एआई आधारित स्क्रीनिंग की सुविधा मिले तो रेडिएशन का खतरा नहीं रहेगा। 4. स्वास्थ्य केंद्र पर वैन आने का प्रचार तंत्र भी कमजोर। यह 73 हजार से ज्यादा महिलाओं के सीने में दबे जख्मों की मैमोग्राफी इमेज है…झिझक-इलाज में देरी से ऐसी तस्वीर बनती है... यह दाग दर्दनाक, जानलेवा है यह राजस्थान की एक 38 वर्षीय महिला की मैमोग्राफी रिपोर्ट है। जांच में स्तन में गांठ दिखाई दी, जिसका आकार सामान्य गांठ से अलग और अनियमित था। इसके बाद बायोप्सी कराई गई, जिसमें स्तन कैंसर की पुष्टि हुई। उन्हें सेकंड स्टेज का कैंसर हुआ है। मैमोग्राफी ऐसी संदिग्ध गांठों की शुरुआती पहचान करने में महत्वपूर्ण जांच मानी जाती है। महिला को सबसे पहले ब्रेस्ट में गांठ महसूस हुई थी। झिझक-संकोच के कारण किसी को नहीं बताया। कई महीने बीत गए। अस्पताल में महिला डॉक्टर नहीं मिली तो लौट आई। तकलीफ बहुत बढ़ गई तो जांच कराई। क्लिनिकल एग्जामिनेशन में डॉक्टर को कैंसर की आशंका हुई। इसके बाद मैमोग्राफी कराई गई, फिर बायोप्सी से पता चला उन्हें स्टेज-2 ब्रेस्ट कैंसर है। जल्द पहचान हो तभी इलाज समय पर मिले सच है कि ब्रेस्ट कैंसर तेजी से फैल रहा है। अब तो 20-25 साल के मरीज भी आ रहे हैं। जितनी जल्द इसकी पहचान हो, उतना ही इलाज जल्द संभव हो सकेगा। कुछ समय में 30 से कम उम्र के 50 मरीज आ चुके। -डॉ.संदीप जसुजा, अधीक्षक, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट ब्रेस्ट कैंसर जांच में AI का इस्तेमाल होना चाहिए स्क्रीनिंग वैन में अल्ट्रासाउंड मशीन से बेहतर जांच हो सकती हैं। 35 से कम उम्र की महिलाओं में अल्ट्रासाउंड मुख्य टेस्ट की तरह काम करता है। किसी भी उम्र में मैमोग्राफी के साथ अल्ट्रासाउंड करें तो बेहतर परिणाम आएंगे। एआई का प्रयोग भी अच्छे परिणाम देगा। -डॉ. प्रशांत शर्मा, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट