अलवर के पास खैरथल कस्बे में एक परिवार की खुशियां पलक झपकते ही मातम में बदल गईं। जिस घर में मंगल गीत गाए जा रहे थे, अब वहां चीख-पुकार सुनाई दे रही है। बारात आने से एक दिन पहले ही दुल्हन लक्ष्मी की अचानक मौत हो गई। मेरी बेटी कई दिनों से खुश थी, नाच रही थी, हंस रही थी, पता नहीं किसकी नजर लग गई। यह कहते-कहते 23 साल की लक्ष्मी के पिता कमलेश का गला रुंद हो गया। शब्द गले में ही अटक गए। उन्होंने कहा कि अचानक लक्ष्मी की तबीयत बिगड़ी और सब कुछ खत्म हो गया। दरअसल, मंगलवार रात 8 बजे घर में हल्दी की रस्म चल रही थी। लक्ष्मी कभी बहनों के साथ डांस कर रही थी, तो कभी खुद ही झूम रही थी। हर कोई उसकी खुशी को देख रहा था। कुछ ही देर बाद उसे मेहंदी लगनी थी। इस बीच लक्ष्मी ने घबराहट की बात कही और बोली कि उसे उल्टी आ रही है। परिजनों ने तुरंत उसे संभाला, जूस पिलाया और पंखे की हवा में लेटा दिया। घर में अफरा-तफरी मच गई कुछ देर तक सबको लगा कि वह ठीक हो जाएगी। घर में शादी की तैयारियां चलती रहीं। लेकिन जब उसकी मां ने उसे उठाने की कोशिश की, तो वह अचेत पड़ी थी। यह देख पूरे घर में अफरा-तफरी मच गई। परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर भागे, लेकिन वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आज (बुधवार) मुंडावर के पास भानौत गांव से लक्ष्मी की बारात आने वाली थी। परिवार शादी की तैयारियों में जुटा था, लेकिन उसकी मौत के बाद परिवार सदमे में है और घर में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस दिन लक्ष्मी के फेरे होने थे, अब उसी दिन उसकी अर्थी उठेगी। यह दर्द परिवार ही नहीं, पूरे कस्बे को झकझोर रहा है। आज होनी थी चचेरे बहनों की शादी लक्ष्मी और उसकी चचेरी बहन पलक की शादी एक ही दिन तय थी। दोनों बहनें साथ-साथ नाचती, गाती और शादी के सपने सजा रही थीं। दोनों की बारात अलग-अलग जगहों से आनी थी। अब एक बहन की डोली उठने से पहले ही दूसरी की अर्थी उठने की तैयारी हो रही है। लक्ष्मी अपने माता-पिता की इकलौती बेटी थी जो ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही थी। उसका एक छोटा भाई है। बेटी की मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। फिलहाल मौत के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। हार्ट अटैक की आशंका परिजन हार्ट अटैक की आशंका जता रहे हैं। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। फिलहाल, खैरथल का यह घर एक ही सवाल पूछ रहा है, जो बेटी कल दुल्हन बनने वाली थी, वह आज अचानक सबको छोड़कर कैसे चली गई?