जिला विधिक सेवा प्राधिकरण औऱ जिला प्रशासन की टीम ने मंगलवार देर रात जयपुर के जमवारामगढ़ क्षेत्र दो बच्चियों का बाल विवाह रूकवाया। बुधवार को 5 और 8 साल की दो नाबालिग बच्चियों को शादी 9 और 11 साल के बच्चों से कराई जानी थी। परिजनों को शादी रुकने का डर था इसलिए एक दिन पहले ही फेरे कराने की तैयारी कर ली थी। सूचना मिलने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पवन जीनवाल मौके पर पहुंचे और परिजनों को पाबंध करके बाल विवाह रूकवाया। उन्होने परिजनों को बाल विवाह के दुष्परिणाम और कानून के बारे में भी बताया। पवन जीनवाल ने बताया कि उन्हें प्रयास संस्था ने इस शादी की सूचना दी थी। इसके बाद मामले की जानकारी रालसा को दी गई। रालसा के सदस्य सचिव हरिओम अत्री के निर्देश पर डीसीपीयू टीम सक्रिय हुई। बच्चियों को बालिका गृह भिजवाया जमवारामगढ़ न्यायिक अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण लिंक मजिस्ट्रेट हुमा कौहरी ने रात्रि में अपने निवास पर ही बाल विवाह निषेधाज्ञा आदेश पारित किया। इसके बाद देर रात टीम जपपुर से सरजौली पहुंची और माता-पिता से समझाइश कर शादी रुकवाई। इस दौरान मौके पर प्रशासन, पुलिस और बाल संरक्षण इकाइयों की संयुक्त टीम सक्रिय हुई। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों शादियां रुकवाई। कार्रवाई के बाद दोनों नाबालिग बच्चियों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सौंपा किया गया। न्यायालय के आदेशानुसार अब वे बालिका गृह में सुरक्षित रहेंगी। प्रशासन ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी है कि दोबारा शादी का प्रयास किया गया तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।