राजस्थान में विलुप्त होने की कगार पर खड़े राजस्थान के राज्य पक्षी 'गोडावण' को बचाने की मुहिम में बड़ी कामयाबी मिली है। जैसलमेर के रामदेवरा और सुदासरी ब्रीडिंग सेंटर में आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन (कृत्रिम गर्भाधान) के जरिए तीन नए चूजों ने जन्म लिया है। इसके साथ ही कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर में गोडावणों का कुनबा बढ़कर अब 76 हो गया है। डेजर्ट नेशनल पार्क के डीएफओ बृजमोहन गुप्ता ने बताया- आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन गोडावण संरक्षण में लाइफलाइन साबित हो रहा है। तकनीक ने दी नई जिंदगी वन विभाग के मुताबिक, रामदेवरा सेंटर में 1 और सुदासरी (सम) सेंटर में 2 नए चूजों का जन्म हुआ है। अब रामदेवरा सेंटर में कुल 52 और सुदासरी में 24 गोडावण हो गए हैं। यह सफलता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि गोडावण प्राकृतिक रूप से साल में केवल एक ही अंडा देता है और उसके भी सुरक्षित बचने की उम्मीद बेहद कम रहती है। ऐसे में 'प्रोजेक्ट गोडावण' के तहत वैज्ञानिक तरीकों से इनकी संख्या बढ़ाना किसी संजीवनी से कम नहीं है। दुनियाभर में केवल 150 गोडावण दुनियाभर में अब महज 150 के करीब ही गोडावण बचे हैं, जिनमें से अधिकांश जैसलमेर राजस्थान में हैं। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) और राजस्थान वन विभाग के संयुक्त प्रयासों से यह संभव हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन चूजों को बड़ा होने पर धीरे-धीरे प्राकृतिक वातावरण (जंगल) में छोड़ने की तैयारी की जाएगी ताकि खुले आसमान में भी इनकी संख्या बढ़ सके। बढ़ता कुनबा, बढ़ती उम्मीद इन खतरों से अब भी जूझ रही 'सोनचिड़िया' ब्रीडिंग सेंटर में तो संख्या बढ़ रही है, लेकिन खुले जंगल में अब भी हाई वोल्टेज बिजली की लाइनें इनके लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। भारी शरीर होने के कारण ये पक्षी तारों को दूर से देख नहीं पाते और टकराने से उनकी मौत हो जाती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद अब इन लाइनों को अंडरग्राउंड करने या 'बर्ड डायवर्टर' लगाने का काम जारी है।