20 बीघा में मैंने गेहूं की फसल बोई थी। 30 से 35 क्विंटल तक फसल होने की उम्मीद थी। बारिश और ओलावृष्टि ने उम्मीद पर पानी फेर दिया है। 4 से 5 लाख का नुकसान हुआ है। अब सरकार से मदद की आस है। इतना कहते-कहते मूलाराम पालीवाल की आंखें डबडबा जाती हैं। जोधपुर के बालेसर तहसील के कुई जोधा गांव के रहने वाले मूलाराम जैसे हजारों किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया है। अच्छी फसल की आस में किसी ने पोती की शादी का सपना देख रखा था, तो कोई अपनी बिटिया को शहर पढ़ने के लिए भेजने वाला था। 3 अप्रैल को आए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने राजस्थान के किसानों की कमर तोड़ दी है। जोधपुर समेत 10 से ज्यादा जिलों में हुई ओलावृष्टि ने पकी-पकाई फसलों को मिट्टी में मिला दिया है। कहीं चने बिखर गए तो कहीं गेहूं की बालियां टूटकर बर्बाद हो गईं। दैनिक भास्कर ने बारिश और ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा प्रभावित चार जिलों (जोधपुर, चूरू, करौली, दौसा) के करीब 20 गांवों में पहुंचा। यहां सबसे ज्यादा गेहूं, ईसबगोल, सौंफ, टमाटर और मिर्च को नुकसान हुआ है। नुकसान झेलने वाले करीब 50 किसानों से उनकी पीड़ा जानी। पढ़िए यह रिपोर्ट… 4 से 5 लाख रुपए का नुकसान, कैसे चलेगा गुजारा जोधपुर जिले के बालेसर कस्बे सहित कुई जोधा, कुई इंदा, बिराई, खुडियाला, बस्तवा और गोपालसर सहित कई गांव ओलावृष्टि की चपेट में आए हैं। इन गांवों में खेतों में खड़ी फसल को भारी नुकसान हुआ है। किसान मूलाराम की 4-5 लाख रुपए की फसल बर्बाद हो गई। मूलाराम ने बताया- खेती ही उनकी आय का एक जरिया है। इस सीजन अपना परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो जाएगा। जीरे की फसल को नुकसान कुई जोधा के ही जीरा किसान रामलाल पर भी मौसम की मार पड़ी है। उनकी 20 बीघा जमीन पर की गई जीरे की फसल खराब हो गई है। रामलाल ने बताया- मैंने 20 बीघा में जीरे की खेती की थी। पिछले दो-तीन दिन से हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने पूरी फसल को तबाह कर दिया है। खेतों में काटकर रखी जीरे की फसल भीग गई। उसकी क्वालिटी खराब हो चुकी है। 6 लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ है। इस बार फसल से अच्छी कमाई की उम्मीद थी। बेटी को पढ़ने के लिए शहर भेजना था। मगर अब उसे नहीं भेज पाऊंगा। बालेसर में फसलों को हुए नुकसान पर तहसीलदार हुकम सिंह सिसोदिया ने कहा- राज्य सरकार की ओर से फसलों को हुए नुकसान की गिरदावरी (सर्वे) करने के लिए जिला स्तर पर आदेश जारी हो चुका है। फिलहाल वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर बना हुआ है। जब तक यह वेस्टर्न डिस्टरबेंस खत्म नहीं हो जाता, तब तक गिरदावरी शुरू नहीं की जा सकती। अगले सप्ताह में गरदावरी के शुरू होने की उम्मीद है। लालसोट में भी बुरा हाल, अनाज के अलावा सब्जियों को भी नुकसान दौसा जिले के लालसोट में भी लगातार दो दिन तक (तीन और चार अप्रैल) ओले गिरे। जिले के डिडवाना, अमराबाद, बिडौली, रालावास, सलेमपुरा, निजामपुरा, टोरडा और गोदावास सहित कई गांवों में अचानक बारिश और ओलावृष्टि होने से किसानों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। रबी के सीजन में गेहूं, चना के अलावा सबसे ज्यादा सब्जियों और फलदार फसलों की खेती होती है। ओले पड़ने से सब्जियों के पौधे टूट गए हैं। ओले गिरने से टमाटर के पौधे खेतों में बिछ गए। पोती की शादी के लिए लेना पड़ेगा कर्ज किसान जगदीश सैनी ने बताया- दो बीघा में मिर्ची-टमाटर और दो बीघा में गेहूं की फसल लगाई थी। 19 अप्रैल को दो पोतियों की शादी है। खेत में टमाटर-मिर्च की फसल लगभग तैयार थी। कुछ दिनों में मंडी ले जाने वाले थे। उनसे मिले पैसों से पोतियों की शादी में व्यवस्था करनी थी। अब ओलावृष्टि से हुई फसल की हालत देख कर कुछ समझ नहीं आ रहा है। अब कर्ज लेने के सिवा कोई चारा नहीं है। किसान बोला- 15 बीघा की फसल खराब हुई बिडौली (दौसा) के रहने वाले किसान रामफूल मीणा बताते हैं- 15 बीघा में जौ और गेहूं की खेती की थी। लगातार बारिश और ओलावृष्टि से पूरी फसल खराब हो गई। अब नमी लग चुकी फसल की मंडी में या तो ग्राहक नहीं मिलेंगे या फिर कौड़ियों के भाव मिलेंगे। इस मौसम की मार ने हमारी मेहनत पर पानी तो फेरा ही है, हमारे परिवार का भविष्य भी संकट में डाल दिया है। सौंफ की फसल खराब करौली जिले के टोडाभीम कस्बे में ओलावृष्टि से सौंफ किसनों को बड़ा नुकसान हुआ है। पदमपुरा गांव के किसान छोटेलाल मीणा ने बताया- इस बार बड़ी उम्मीदों के साथ सौंफ की बुवाई की थी। मैंने दिनरात एक कर इस फसल को तैयार किया। फसल कटाई के लिए लगभग तैयार थी। 3 अप्रैल को अचानक बदले मौसम और तेज ओलावृष्टि ने सब कुछ तबाह कर दिया। ओलों की मार इतनी तेज थी कि सौंफ के दाने तक झड़ गए और पौधे टूटकर बिखर गए। मेरी पूरी फसल बर्बाद हो गई। खाद-बीज का सारा पैसा मिट्टी में मिल गया। करीब 2.50 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। सरदारशहर में जमीन पर बिछी ईसबगोल की फसल चूरू जिले के सरदारशहर में भी ओलावृष्टि और तूफान से गेहूं, ईसबगोल, मेथी की फसल को नुकसान हुआ है। खेतों में खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई। कटी फसल भीग कर खराब हो गई। कस्बे के भानीपुरा गांव के किसान भगवानाराम जाखड़ ने बताया- 4 अप्रैल को हुई तेज ओलावृष्टि ने भानीपुरा गांव सहित आसपास की 10 से अधिक ग्राम पंचायतों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। ओलावृष्टि इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में खेतों का नजारा बदल गया। ईसबगोल की फसल पर करीब डेढ़ फीट तक बर्फ जैसी मोटी परत जम गई। उन्होंने कहा कि किसानों ने इस फसल के लिए महीनों मेहनत की थी। बीज, खाद, दवाइयों व सिंचाई पर मोटी रकम खर्च की थी। अब ओलावृष्टि के कारण न केवल उनकी मेहनत बेकार हो गई, बल्कि खेती में लगी पूरी लागत भी डूब गई है। किसान बोला- सोचा था आर्थिक स्थिति सुधरेगी सरदारशहर के बिजरासर गांव के किसान उमाराम पोटलिया ने कहा- बारिश और आंधी से मेरी फसल को भी भारी नुकसान हुआ है। कई महीनों से दिन-रात मेहनत करके अपनी फसल तैयार कर रहा था। इस खेती में मैंने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। गेहूं की फसल पक चुकी थी और कटाई का समय भी नजदीक आ गया था। परिवार के सभी लोग इसी उम्मीद में थे कि इस बार फसल अच्छी होगी तो घर की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। अफसोस अब हालात ऐसे नहीं रहे। फसलें बर्बाद हो गई हैं। उमाराम पोटलिया ने मायूस होकर कहा कि उसे समझ नहीं आ रहा है कि कैसे बिजली का बिल भरेगा। कैसे केसीसी का ब्याज भरेगा। अब सरकार से आस है कि जल्द गिरदावरी कराकर किसानों को राहत दे। कृषि अधिकारी बोले- 72 घंटे के अंदर बीमा कंपनी को शिकायत करें दौसा कृषि विभाग के सहायक निदेशक अशोक कुमार मीणा कहते हैं- कई क्षेत्रों में तेज तूफान के साथ बारिश और ओलावृष्टि हुई है। विभाग द्वारा फील्ड स्टाफ के माध्यम से नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पछेती गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है। साथ ही सब्जियों और फलदार बगीचों को भी नुकसान पहुंचा है। अशोक कुमार ने किसानों से अपील की है कि जिनकी फसल को नुकसान हुआ है, वे 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 14447 पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि बीमा कंपनी के माध्यम से उचित मुआवजा दिलवाया जा सके। अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम, जानिए… …. यह खबर भी पढ़िए… बारिश-ओलों से फसलें उजड़ी, गेहूं-ईसबगोल की खेती बर्बाद, किसान बोले- कर्ज लेकर खेती की थी, घर में खाने का संकट हो गया राजस्थान में बारिश-ओले गिरने से फसलें उजड़ गईं और गेहूं की खेती बर्बाद हो गई। ईसबगोल की 70 प्रतिशत फसल खराब हो गई। किसानों का कहना है कि अब तो घर में खाने का भी संकट हो गया। (पढ़ें पूरी खबर)