राजस्थान में मरीज से पहले यहां के हेल्थ सिस्टम को इलाज की जरूरत है। यहां की CHC, PHC सहित उपजिला अस्पतालों में न दवाईयों की पर्याप्त उपलब्धता है और न ही जांचें हो रही हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही हेल्थ डिपार्टमेंट राजस्थान को लिखे पत्र में सिस्टम की खामियों को लेकर नाराजगी जताई। इस ​पत्र में मंत्रालय ने हैल्थ सेंटरों (हॉस्पिटलों) पर मरीज को उपलब्ध करवाने वाली जरूरी जांचों की सुविधा पूरी तरह नहीं होने का जिक्र किया है। दरअसल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य के हर स्तर के हेल्थ सेंटर पर जरूरी जांचों की सुविधा डवलप करने के निर्देश दिए थे। ये जांचें नि:शुल्क करने के निर्देश ​हैं। मंत्रालय ने जिला हॉस्पिटल (DH) पर 134 तरह के टेस्ट, उपजिला हॉस्पिटल (SDH) पर 111 टेस्ट, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पर 97 टेस्ट, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पर 63 टेस्ट और उप केंद्र (SC) पर 14 तरह के टेस्ट की सुविधा की गाइडलाइन बना रखी है। वहीं राजस्थान में जारी की गई रिपोर्ट देखें तो PHC, CHC स्तर पर निर्धारित संख्या की 50 फीसदी से भी कम जांचें हो रही हैं। ये रिपोर्ट प्रदेश के स्टेट नोडल ऑफिसर की तरफ से दी गई है। मंत्रालय ने जांचों की संख्या जल्द बढ़ाने और मरीजों को सुविधा देने के निर्देश दिए हैं। सबसे कम PHC पर जांचें हो रही नोडल ऑफिसर की रिपोर्ट के मुताबिक- हर PHC स्तर पर 63 में से औसतन 15 ही जांचें हो रही हैं। वहीं CHC स्तर पर 97 में से 37 तरह की जांचों की सुविधा मिल रही है। इसी तरह जिला हॉस्पिटल स्तर पर 134 में से 96 तरह की जांचें और उप जिला हॉस्पिटल स्तर पर 111 में से औसतन 96 जांचें हो रही हैं। इसके अलावा सब-सेंटर पर सभी 14 की 14 जांचों की सुविधा मरीजों को उपलब्ध करवाई जा रही है। सर्वे में स्थिति अलग इधर मंत्रालय की ओर से ओपन डेटा किट (ODK) के डेशबोर्ड के जरिए जो डेटा जुटाया गया है। इसमें स्थिति और विकट बताई गई है। ODK रिपोर्ट के मुताबिक- राजस्थान के हर PHC स्तर पर 63 में से औसतन 18 जांचें, CHC स्तर पर 97 में से 32 तरह की जांचें, जिला हॉस्पिटल के स्तर पर 134 में से 53 तरह की जांचें, उप जिला हॉस्पिटल के स्तर पर 111 में से औसतन 42 और सब सेंटर पर 14 में से केवल 7 जांचों की सुविधा ही मरीजों को उपलब्ध करवाई जा रही हैं। डेटाबेस में गलतियों पर नाराजगी, ठीक करने के निर्देश मंत्रालय ने स्वास्थ्य केंद्रों पर जांचों की संख्या कम होने के साथ ही डाटा में गलतियां होने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने 31 मार्च तक उपलब्ध हो रही जांचों का जिक्र करते हुए इन जांचों की संख्या जल्द बढ़ाने और मरीजों को सुविधा देने के निर्देश दिए हैं।