राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस फरजंद अली ने भीलवाड़ा के प्रतापनगर थाने से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए SHO राजपाल सिंह को फटकार लगाई। अदालत ने गुरुवार को जांच अधिकारी को प्रथम दृष्टया दोषी माना और मामले में DGP व गृह सचिव को हस्तक्षेप के निर्देश दिए। यह मामला 71 साल के पत्रकार को दी गई धमकी और शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने से जुड़ा है। दादागिरी करनी है तो नौकरी पर क्यों हो कल सुनवाई के दौरान जस्टिस फरजंद अली ने प्रतापनगर थाना प्रभारी राजपाल सिंह से कहा कि इतनी ही दादागिरी करनी है तो नौकरी पर क्यों हो? जाओ गांव में खुली जीप लेकर घूमो। हाथ में चाबुक ले लो। वकील भारत भूषण चारण ने अदालत को बताया कि मामले में पीड़ित 71 साल के बुजुर्ग हैं, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। थानेदार उन्हें बार-बार डरा-धमका रहा है, जिससे वे बेहद खौफ में हैं। पत्रकार को धमकी, कार्रवाई में ढिलाई पर अदालत नाराज मामले में बुजुर्ग पत्रकार अनिल राठी ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उनकी एक टिप्पणी से नाराज होकर थाना प्रभारी ने उन्हें अपशब्द कहे और गोली मारने की धमकी दी। राठी ने तुरंत एसपी सहित वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। शरीफ आदमी के साथ गुंडों जैसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी शरीफ इंसान के साथ गुंडों जैसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जज ने कहा, “आम नागरिक के साथ ऐसी भाषा? इसे एक हफ्ते के भीतर इस जिले से बाहर करो।” आखिरी में उन्होंने कहा, “एक बार तो सिस्टम को टाइट करना ही पड़ेगा। अपनी विभागीय कार्रवाई जारी रखो, लेकिन यह सुनिश्चित हो कि वह अधिकारी उस इलाके से दूर रहे।” DGP और गृह सचिव को हस्तक्षेप का आदेश सुनवाई के दौरान जस्टिस अली ने राजस्थान पुलिस के डीजीपी और गृह सचिव को मामले में सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ संकेत दिया कि पुलिस अधिकारियों द्वारा इस तरह का व्यवहार गंभीर है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। SHO पर कार्रवाई की अनुशंसा, नोटिस में बदलाव कोर्ट कोर्ट में पुलिस विभाग की ओर से भीलवाड़ा शहर डिप्टी सज्जन सिंह उपस्थित हुए। कोर्ट ने उनसे पूछा कि विभाग ने क्या कार्यवाही की। जवाब में बताया गया कि SHO को 17 सीसी के तहत नोटिस दिया गया है। तब कोर्ट ने कहा कि 17 तो फोर्मल है। 16 में क्यों नहीं दिया। कोर्ट ने नियम 16 में बदलने के निर्देश दिए। साथ ही, सीआई राजपाल सिंह को जिले से बाहर करने की अनुशंसा भी की गई है। अगली सुनवाई 8 मई को, जांच रिपोर्ट तलब कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 8 मई तय करते हुए विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले, SHO को 23 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया था। यह है मामला प्रतापनगर थानाधिकारी राजपाल सिंह और पत्रकार अनिल राठी के बीच पिछले माह बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ। जिसमें एसएचओ राजपाल सिंह की ओर से पत्रकार राठी को सोशल मीडिया पर टिप्पणी को लेकर फोन पर गाली गलौच करते हुए मरने-मारने की धमकी दे रहे हैं। अपशब्दों का प्रयोग करते हुए मिलने पर मार देने की धमकी दी। एसपी धर्मेंद्र सिंह ने मामले की जांच एसपी हेमंत कुमार को सौंपी। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों और आदेशों के बाद भीलवाड़ा पुलिस महकमे में हड़कंप जैसे हालात बन गए हैं। इस कार्रवाई को कानून व्यवस्था और पुलिस जवाबदेही के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। यह मामला न सिर्फ एक पत्रकार को दी गई धमकी का है, बल्कि पुलिस की जवाबदेही और आम नागरिकों की सुरक्षा से भी जुड़ा है।