चूरू में राजस्थान जाट महासभा ने किसान नेता और भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के संस्थापक रामावतार पलसानिया की कथित अमर्यादित टिप्पणी का कड़ा विरोध किया है। महासभा ने पलसानिया के बयान की निंदा करते हुए एक निंदा प्रस्ताव पारित किया और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने का निर्णय लिया। यह जानकारी राजस्थान जाट महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष रामरतन सिहाग ने दी। बयान को राजनीति से प्रेरित बताया यह निर्णय रविवार को सैनिक बस्ती स्थित राजस्थान जाट महासभा कार्यालय में आयोजित एक बैठक में लिया गया। बैठक में सिहाग ने कहा कि चौधरी चरण सिंह सर्वहारा वर्ग के सशक्त नेता थे। उन्होंने जीवनभर जातिवाद के खिलाफ आवाज उठाई और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए अंतरजातीय विवाह का समर्थन किया। सिहाग ने आगे कहा कि चौधरी चरण सिंह केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक कुशल अर्थशास्त्री भी थे। उनकी नीतियों का लाभ आज भी देश को मिल रहा है। जाट महासभा के जिला अध्यक्ष रणवीर कस्वां ने पलसानिया के बयान को राजनीति से प्रेरित बताया। 'महान नेता के खिलाफ ऐसी बयानबाजी अशोभनीय' कस्वां ने कहा कि चौधरी चरण सिंह ग्रामीण भारत के विकास के जनक थे और उनके खिलाफ ऐसी बयानबाजी निंदनीय है। जाट महासभा के बीकानेर संभाग अध्यक्ष हरफूलसिंह भांभू ने कहा कि पलसानिया का बयान दर्शाता है कि वे समाज के पदाधिकारी के बजाय किसी व्यक्ति विशेष के प्रति निष्ठा रखते हुए बयान दे रहे हैं। जिला उपाध्यक्ष राजेश तेतरवाल ने भी चौधरी चरण सिंह जैसे महान नेता के खिलाफ ऐसी बयानबाजी को अशोभनीय बताया। इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष गंगाराम कड़वासरा, महासचिव रामलाल सारण, कोषाध्यक्ष धर्मपाल सारण, तहसील अध्यक्ष रामनिवास भांभू, जिला कार्यकारिणी सदस्य रामावतार भांबू, प्रकाश लांबा और सत्यप्रकाश बेनीवाल सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।