जिला एवं सेशन न्यायाधीश अनंत भंडारी ने गुरुवार को बीएल पब्लिक स्कूल के स्टूडेंट्स को बताया कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ नहीं होता है। कोई डिजिटल अरेस्ट होने की बात कहे तो समझ जाओ ये साइबर अपराधी है। डिजिटल अरेस्ट की कानून में कहीं कोई जगह नहीं है। दूसरा अनजान से सोशल प्लेटफॉर्म पर दोस्ती कर जानकारी साझा करना भारी पड़ जाता है। AI से फोटो को बदलकर भी मिसयूज कर लिया जाता है। इसलिए सबको सावधान रहने की जरूरत है। बच्चों को अपराध से बचने के तरीके बताए राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से पूरे प्रदेश में चलाए जा रहे साइबर सिक्योरिटी व अवेयरनेस कार्यक्रम के तहत जिला एवं सेशन न्यायाधीश अनंत भंडारी नयाबास स्थित बीएल पब्लिक स्कूल पहुंचे थे। वहां के स्टूडेंट्स को साइबर अपराध और उससे बचने के तरीके बताए। डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं जिला जज भंडारी ने बच्चों को समझाते हुए कई उदाहरण दिए। जज ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं है। डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं है। ये सिर्फ डराने के लिए साइबर अपराधी करते हैं। वे डराकर व्यक्ति को उसी कमरे में बंद करने का दबाव बनाते हैं। डिजिटल अरेस्ट कुछ नहीं होता है। डिजिटल अरेस्ट के धोखे में आने की जरूरत नहीं है। बच्चियों के फोटो के दुरुपयोग की संभावना उन्होंने बच्चों को सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग की सलाह दी। कहा कि अपनी निजी जानकारी और फोटो सोच-समझकर ही साझा करें। विशेष रूप से बच्चियों की फोटो का एआई तकनीक के माध्यम से दुरुपयोग होने की संभावना रहती है। इसलिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन और मजबूत पासवर्ड रखना अधिक सुरक्षित रहता है। 'कोर्ट वाली दीदी' शिकायत पेटी लगाई कार्यक्रम के दौरान स्कूल के डायरेक्टर सुनील बिलखा और प्रिंसिपल सुमन बिलखा ने अतिथियों का स्वागत किया। वहीं, न्यायाधीश द्वारा स्कूल में “कोर्ट वाली दीदी” के नाम से शिकायत पेटिका भी स्थापित की गई, जिसमें छात्र-छात्राएं अपनी समस्याएं दर्ज कर सकेंगे।