राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में सामने आए भ्रष्टाचार के मामले में राज्य सरकार ने हाल ही में बड़ा एक्शन लिया था। सरकार ने 51 सरकारी और निजी अस्पतालों को योजना से सस्पेंड (ब्लैकलिस्ट) कर दिया था। वहीं, 24 अस्पतालों पर करीब 3 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। यह कार्रवाई 17 जुलाई को जारी आदेश के तहत की गई थी। कार्रवाई के दूसरे ही दिन जैसलमेर के सरकारी जवाहिर हॉस्पिटल को ब्लैकलिस्ट की सूची से हटा दिया गया। यानी अस्पताल को महज 24 घंटे के भीतर फिर से RGHS योजना में शामिल कर लिया गया। इसके बाद अस्पताल में RGHS के तहत मिलने वाली सभी सुविधाएं और कैशलेस इलाज पहले की तरह फिर से शुरू हो गया। जैसलमेर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राजेंद्र कुमार पालीवाल ने बताया कि निजी हॉस्पिटल पर जीरो TID का नियम लागू होता है, इस नियम के तहत IPD अगर जीरो रहे यानी भर्ती मरीज लंबे समय से निजी हॉस्पिटल में नहीं हो रहे हो तो उसको ब्लैकलिस्ट किया जाता है, लेकिन सरकारी हॉस्पिटल इस नियम से बाहर है। उन्होंने कहा कि जवाहिर हॉस्पिटल सरकारी है, लेकिन लिस्ट में सिर्फ जवाहिर हॉस्पिटल लिखा होने से विभाग को शायद लगा कि ये निजी हॉस्पिटल होगा, इसी कारण इसे ब्लैकलिस्ट किया गया था, लेकिन आज VC के माध्यम से जानकारी दी गई कि इस भूल को सुधार लिया गया है और इसे ब्लैकलिस्ट से बाहर किया गया है। ऑनलाइन डेटा के आधार पर बदला गया फैसला जैसलमेर के CMHO डॉ. राजेंद्र कुमार पालीवाल ने बताया - 18 जुलाई को उच्च स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अस्पताल को ब्लैकलिस्ट से हटाने की जानकारी दी गई है। पूरा सिस्टम ऑनलाइन है और ऑनलाइन डेटा के आधार पर ही निर्णय में बदलाव किया गया है। फैसले से जैसलमेर और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों के हजारों बुजुर्ग पेंशनर्स को बड़ी राहत मिली है। ये लोग शुगर, ब्लड प्रेशर, दिल और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज और मुफ्त दवाओं के लिए मुख्य रूप से इसी सरकारी अस्पताल पर निर्भर हैं। अब उन्हें इलाज के लिए किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। ऑडिट में सामने आई थीं कई गड़बड़ियां बता दें, तीन महीने तक की गई कार्रवाई के बाद 17 जुलाई को सरकार ने आदेश जारी किया था। चिकित्सा विभाग की जांच और ऑडिट के दौरान प्रदेश के कई अस्पतालों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। पिछले तीन महीनों में 51 सरकारी और निजी अस्पतालों पर नियमों का उल्लंघन कर सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे। इसी आधार पर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया था। ओपीडी मरीजों को कागजों में भर्ती दिखाकर बनाए गए बिल जांच में सामने आया कि कई अस्पताल ज्यादा भुगतान लेने के लिए ओपीडी (बाहरी मरीज) को कागजों में आईपीडी (भर्ती मरीज) दिखा रहे थे। इसके अलावा मरीजों की जानकारी या सहमति के बिना अनावश्यक लैब टेस्ट कराना और एक ही इलाज के कई फर्जी बिल बनाकर भुगतान लेना जैसी गड़बड़ियां भी मिलीं। शिकायतें सही पाए जाने पर 24 अस्पतालों पर करीब 3 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया। --- संबंधित ये खबर भी पढ़ें … राजस्थान के 51 हॉस्पिटल RGHS से निलंबित:24 अस्पतालों पर 3 करोड़ जुर्माना; जयपुर के मणिपाल, सोनी और इंडस समेत 9 हॉस्पिटल शामिल राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में भ्रष्टाचार को लेकर राज्य सरकार ने 51 अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया। पूरी खबर पढ़िए