झालावाड़ के पिपलोदी में पिछले साल स्कूल की छत गिरने से 7 मासूम बच्चों की मौत हुई थी। इसके बाद जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए 503 करोड़ का बजट जारी किया गया था। लेकिन जिम्मेदारों की नाक के नीचे ऐसा फर्जीवाड़ा हुआ, जिसने हजारों मासूमों की जिंदगी फिर खतरे में डाल दी। आदेश थे 20 हजार से ज्यादा स्कूलों की जर्जर छतों को हटाकर मजबूत करने के, लेकिन दरारों में रंगाई-पुताई भरकर छोड़ दिया। जहां 2 लाख खर्च करने थे, वहां महज 40-45 हजार का काम कर पूरा भुगतान उठा लिया। दैनिक भास्कर ने 5 जिलों- जयपुर, अजमेर, दौसा, नागौर और डीडवाना-कुचमान के 20 स्कूलों की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन की। हम सर्टिफाइड सिविल इंजीनियर और टाउन प्लानर डॉ. अंकित कश्मीरी गुप्ता को साथ लेकर गए। फिर कैमरे में जो सच रिकॉर्ड हुआ वो चौंकाने वाला था। पढ़िए- किस जिले में क्या हुआ… 1. जयपुर: जिले के 1691 स्कूलों के लिए प्रति स्कूल 1.96 लाख के हिसाब से 33.77 करोड़ रुपए मंजूर हुए थे। टेंडर के अनुसार इस बजट में वाटर प्रूफ करने के साथ-साथ 10-11 अलग-अलग काम होने थे। अब देखिए- स्कूलों के हालात… स्कूल-1 : पीएम श्री राजकीय उच्च उच्च माध्यमिक विद्यालय, दूदू एक्सपर्ट ऑब्जर्वेशन : एक्सपर्ट कमेंट : ब्रांडेड कंपनियां 12 लेयर वाटरप्रूफिंग के लिए 32 रुपए से 42 रुपए प्रति स्क्वायर फीट की दर से चार्ज करती हैं। यह उतनी बड़ी राशि का काम नहीं लगता, जितना कागजों में दर्शाया गया है। मेरे अनुमान से कुल खर्च 40 से 50 हजार रुपए से अधिक का नहीं बैठता। स्कूल-2 : राजकीय उच्च माध्यमिक बालिका विद्यालय, दूदू एक्सपर्ट ऑब्जर्वेशन : एक्सपर्ट कमेंट : वायर मैश के साथ वाटरप्रूफिंग की बाजार लागत अधिकतम 32-40 रुपए प्रति वर्ग फीट है। बिना वायर मैश के 20-22 रुपए प्रति वर्ग फीट है। इस लिहाज से यहां हुए काम की अधिकतम लागत 40,000 या उससे भी कम बैठती है। स्कूल एलडीसी हनुमंत सिंह ने बताया: करीब 2-3 महीने पहले कुछ मजदूर आए थे। दो-तीन कमरों की छत पर व्हाइट पेंट मारकर चले गए। बजरी-सीमेंट, पाइप डालने जैसा कोई भी काम नहीं हुआ। 2. दौसा: जिले के 1010 स्कूलों में प्रति स्कूल 1 लाख 96 हजार रुपए के हिसाब से कुल 19 करोड़ 79 लाख 60 हजार रुपए के टेंडर निकाले थे। टेंडर शर्तों के अनुसार कई स्कूलों में तो 26 तरीके के काम होने थे। देखिए- 4 स्कूलों के हालात स्कूल-1 : महात्मा गांधी स्कूल, दौसा प्रिंसिपल का दावा: प्रिंसिपल पीएल मीणा ने फोन पर बताया कि बताया कि फंड से प्रिंसिपल ऑफिस की छत और एक बड़े हॉल की छत पर वाटरप्रूफिंग का काम किया गया है। स्कूल-2 : रामकरण जोशी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दौसा स्कूल-3 : आनंद शर्मा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दौसा स्कूल-4 : राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, रामकुंड, दौसा ठेकेदार ने की खानापूर्ति: रामकुंड स्कूल में राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल सिंगवाड़ा (दौसा) के प्रिंसिपल सुशील कुमार राय मिले। उन्होंने बताया कि ऐसा ही वाटरप्रूफिंग का काम उनके स्कूल में भी हुआ है। छत की पट्टियों में दरारें थीं। बारिश में पानी टपकता था। वहां ठेकेदार ने दरारें साफ कर उनको वाटरप्रूफ कोटिंग से भर दिया। न तो पट्टियां बदली और न RCC का कोई काम हुआ। 3. नागौर: जिले के 1287 स्कूलों को 25.74 करोड़ बजट मंजूर हुआ था। प्रति स्कूल 1 लाख 96 हजार रुपए के हिसाब से टेंडर किए थे। हम अखावास और बीजाथल के 4 स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचे। देखिए- यहां के हालात स्कूल-1 : प्राइमरी स्कूल, गुर्जरों की ढाणी, बीजाथल स्कूल-2 : राजकीय प्राथमिक विद्यालय, अखावास स्कूल-3 : प्राइमरी स्कूल, नैणों की ढाणी, अखावास 4. अजमेर: जिले के 219 स्कूलों में रिपेयरिंग के लिए टेंडर सम्रग शिक्षा अभियान (SAMSA) एजेंसी ने किए थे। 536 स्कूलों के टेंडर जिला परिषद् अजमेर ने पंचायत समिति स्तर से किए। प्रत्येक स्कूल में 2 लाख वहीं हर आंगनबाड़ी केंद्रों पर ये काम 1 लाख 86 हजार रुपए से होने थे। देखिए- यहां के हालात स्कूल-1 : राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, गोविंदगढ़ स्कूल प्रिंसिपल सरला का दावा- न तो हमें कुछ बताया गया और न ही हमसे कुछ पूछा गया था। ठेकेदार के आदमी आए और 2 दिन में काम करके चले गए। क्या काम होना था? हमें कोई जानकारी नहीं थी। छत पहले से ही कमजोर थी, भारी टाइल्स बिछाकर वजन और बढ़ा दिया। स्कूल-2 : राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल, रामपुरा नांद स्कूल-3 : राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल, गेगल 5. डीडवाना-कुचामन: जिले में 1018 स्कूलों में रिपेयरिंग के लिए टेंडर सम्रग शिक्षा अभियान (SAMSA) एजेंसी ने किए थे। इसके लिए 20 करोड़ से ज्यादा खर्च होने थे। क्या बोले- कलेक्टर और जिम्मेदार अधिकारी सवाल : SDRF फंड से सभी स्कूलों में रिपेयर के काम करवाए थे। हमारी पड़ताल में सामने आया है कि निर्धारित जी शेड्यूल के अनुसार नहीं हुए हैं? सवाल : ज्यादातर स्कूलों में काम 40-45 हजार का हुआ और भुगतान पूरा 2 लाख कर दिया गया? जवाब : SDRF के काम में किसी एक व्यक्ति का काम नहीं होता। सरपंच और स्कूल की मॉनिटरिंग थी। जिला कलेक्टर ने भी इंस्पेक्शन के लिए कमेटी बनाई गई थी। तीन डिपार्टमेंट के AEN ने उस काम को अपनी एजेंसी के माध्यम से वेरिफाई किया। लास्ट में एसडीएम ने देखा। उसके बाद पेमेंट हुआ। यह कहना ठीक नहीं कि 40-45 हजार का ही काम हुआ है। सवाल : हमारे पास सबूत हैं, दूदू के एक स्कूल में वायर मैश के साथ 12 लेयर वाटरप्रूफिंग करनी थी, वहां वायर मैश के बिना 3-4 कोटिंग की गई थी। जवाब : इस तरह का कोई केस यदि ध्यान में आएगा तो जांच कराएंगे और कार्रवाई करेंगे। सवाल : जिन जगहों पर काम ही पूरा नहीं हुआ वहां ठेकेदारों को भुगतान तक हो गया, कैसे? जवाब : NOC या तो स्कूल के प्रधानाचार्य या वहां के हमारे एईएन ने जारी की होगी। कई जगह पंचायत समिति के प्रतिनिधियों ने NOC जारी की होगी। ये नहीं कहा जा सकता कि गलत NOC जारी हुई है। इस तरह की शिकायत है तो उसकी जांच कर सकते हैं। इन्वेस्टिगेशन स्टोरी के दूसरे पार्ट में कल पढ़िए
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