शाला दर्पण पोर्टल पर प्रपत्र-10 भरने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है, लेकिन प्रदेश के करीब आधे स्कूलों में यह काम अभी बाकी है। ऐसे में शिक्षक संगठनों ने पढ़ाई और अन्य ऑनलाइन कार्यों का दबाव बताते हुए अंतिम तिथि 15 अगस्त तक बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि जुलाई जैसे अहम शिक्षण महीने में शिक्षकों पर अतिरिक्त डेटा एंट्री का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। जुलाई में पढ़ाई के साथ बढ़ा ऑनलाइन काम: शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया - शिक्षा विभाग में जुलाई का महीना सबसे अहम माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान नए शिक्षा सत्र की शुरुआत होती है। स्कूलों में नए विद्यार्थियों के एडमिशन, ड्रॉपआउट रोकने, आधारभूत सीखने की शुरुआत और अभिभावकों से संवाद जैसे कई जरूरी काम चलते हैं। इस बार इन सभी जिम्मेदारियों के साथ लाखों शिक्षक शाला दर्पण पोर्टल पर प्रपत्र-10 अपडेट करने में भी लगे रहे। विभाग इसे रिकॉर्ड अपडेट करने की सामान्य प्रक्रिया मान रहा है, लेकिन शिक्षक संगठनों, शिक्षाविदों और शिक्षा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षक का मुख्य काम पढ़ाना है, डेटा एंट्री करना नहीं। तीन बार बढ़ी समय सीमा, फिर भी काम अधूरा प्रपत्र-10 भरने की अंतिम तिथि पहले 10 जुलाई तय की गई थी, लेकिन सर्वर की धीमी गति और तकनीकी दिक्कतों के कारण हजारों शिक्षक समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके। इसके बाद विभाग ने समय सीमा पहले 20 जुलाई और फिर बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी, लेकिन इसके बावजूद काम पूरा नहीं हो पाया। शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया कि जुलाई में शाला दर्पण पर विद्यार्थियों के एडमिशन, टीसी, डीबीटी, छात्रवृत्ति, पुस्तक वितरण समेत कई जरूरी काम होते हैं। वहीं स्टाफ कॉर्नर सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक बंद रहता है, जिससे प्रपत्र-10 भरने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। इसलिए अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 अगस्त करने की मांग की गई है। हर साल एक ही जानकारी भरने पर सवाल, ये दिए सुझाव: मोहर सिंह सलावद ने कहा - शिक्षकों की नियुक्ति, सेवा पुस्तिका, वेतन, पदस्थापन, पदोन्नति और अन्य सभी रिकॉर्ड पहले से ही विभागीय कार्यालयों और डिजिटल डेटाबेस में उपलब्ध हैं। ऐसे में हर साल वही जानकारी दोबारा भरवाना समय और संसाधनों की पुनरावृत्ति है। हालिया तबादला प्रक्रिया में रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बावजूद कई विसंगतियां सामने आईं, जिससे डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि केवल बदली हुई जानकारी ही अपडेट करवाई जाए, रिकॉर्ड का सत्यापन मंत्रालयिक कर्मचारी करें और शाला दर्पण पोर्टल पूरे साल खुला रखा जाए। सलावद ने कहा कि भविष्य में जुलाई, अगस्त और सितंबर जैसे महत्वपूर्ण शिक्षण महीनों में इस तरह के अतिरिक्त ऑनलाइन कार्य नहीं करवाए जाएं तथा प्रपत्र-10 का रिकॉर्ड मंत्रालयिक कर्मचारियों या शाला दर्पण प्रभारी से अपडेट कराया जाए।